स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका और उसके साथी देश अब पूरी तरह तैयार हैं. इस रणनीतिक रास्ते पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य मिशन की तैयारी चल रही है, जबकि ईरान ने यहां से गुजरने वाले जहाजों पर नए शुल्क लगाने का फैसला किया है.

📰: Strait of Hormuz: अमेरिका का ऐलान, समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए साथ आएंगे साथी देश

एक अमेरिकी अधिकारी ने 5 जुलाई 2026 को बताया कि उनके सहयोगी देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा के लिए हिस्सा लेने को तैयार हैं. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने 3 जुलाई को एक साझा बयान जारी किया था. उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह रास्ता बहुत जरूरी है, इसलिए वे यहां एक बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन भेजने के लिए तैयार हैं. ओमान ने भी अपने समुद्री इलाके में सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर काम करने की बात कही है.

यूएस नेवी की देखरेख वाली एक संस्था ने बताया कि पिछले 72 घंटों में उन्होंने 70 जहाजों को रास्ता पार करने में मदद की है. हालांकि, ट्रैफिक पहले के मुकाबले कम है और खतरे का स्तर अभी भी काफी ज्यादा है. वहीं, NATO के नेता 7 और 8 जुलाई को अंकारा में बैठक करेंगे, ताकि यह तय किया जा सके कि जहाजों की मदद कैसे की जाए.

दूसरी तरफ, ईरान ने बाहरी देशों की सैन्य गतिविधियों का कड़ा विरोध किया है. ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम घरिबाबादी ने चेतावनी दी कि यह इलाका बाहरी शक्तियों के लिए अपनी ताकत दिखाने की जगह नहीं है. ईरान ने 5 जुलाई को यह भी ऐलान किया कि अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को ‘सर्विस फीस’ देनी होगी, हालांकि कुछ दोस्त देशों को इससे छूट मिलेगी. ईरान का कहना है कि वह इस समुद्री रास्ते का असली सुरक्षा गारंटर है.

समुद्री इंटेलिजेंस फर्म Windward की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 जुलाई को इस इलाके के दक्षिणी कॉरिडोर में जहाजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कई जहाजों को अपने रास्ते बदलने पड़े या उन्हें वापस लौटना पड़ा. फ्रांस और ब्रिटेन ने इस रास्ते से माइंस यानी समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने के लिए एक फोर्स भेजने की योजना बनाई है, लेकिन ईरान ने इसे अपने मामले में दखल बताकर खारिज कर दिया है.

इतना ही नहीं, ईरान, रूस और चीन इस महीने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ‘मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026’ नाम का संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने वाले हैं. रूस और चीन की सेनाएं पहले ही चीन के किंगदाओ के पास अपनी एक्सरसाइज पूरी कर चुकी हैं.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.