US और इसराइल ने मिलाया हाथ, गाजा में शांति और हथियारबंद लोगों पर लगाम कसने के लिए बने नए ग्रुप.

गाजा में चल रहे संघर्ष और मानवीय संकट को हल करने के लिए अमेरिका और इसराइल ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है। 17 अगस्त 2026 को इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अमेरिकी दूत Jared Kushner और बोर्ड ऑफ पीस के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य गाजा में शांति योजना को लागू करना और दो नए संयुक्त कार्य समूहों का गठन करना था। इस चर्चा में शिन बेट के निदेशक David Zini और सैन्य खुफिया प्रमुख Shlomi Binder जैसे बड़े अधिकारी भी शामिल रहे थे।
गाजा को पूरी तरह हथियार मुक्त करने का प्लान
पहले कार्य ग्रुप को गाजा की पूरी तरह से सैन्यवाद समाप्ति यानी डिमिलिटराइजेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत सभी छोटे और भारी हथियारों को इकट्ठा करके हमेशा के लिए नष्ट किया जाएगा और सुरंगों के नेटवर्क को भी पूरी तरह से तोड़ा जाएगा। अमेरिकी दूत Jared Kushner ने अनुमान जताया कि इन शुरुआती कामों को पूरा होने में 60 से 90 दिन का समय लग सकता है। कुशनर ने साफ अल्टीमेटम दिया है कि जब तक हथियारों को पूरी तरह हटाने का काम पूरा नहीं होता, तब तक इस इलाके का कोई भी बड़ा पुनर्निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाएगा।
नियमों के मुताबिक, इन सरेंडर किए गए हथियारों को नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) को देने के बजाय अमेरिकी नेतृत्व वाली इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) को सौंपा जाएगा। इस फोर्स की कमान अमेरिकी जनरल Jasper Jeffers संभाल रहे हैं।
मानवीय संकट और स्वच्छता पर दूसरा फोकस
दूसरा कार्य समूह पूरी तरह से मानवीय जरूरतों पर ध्यान दे रहा है, जिसमें मुख्य रूप से साफ पानी, स्वच्छता और जनस्वास्थ्य शामिल हैं। इस समूह का काम बीमारियों के फैलने से रोकना है। राजनीतिक विश्लेषक Wesam Afifa के अनुसार, इस समूह में इसराइल की दिलचस्पी का एक बड़ा कारण यह भी है कि वह इसराइल के आसपास के इलाकों और अपनी सेना के पास किसी भी तरह की महामारी या बीमारी के फैलने से सुरक्षा चाहता है।
इसराइल का कड़ा रुख और नेताओं के बयान
प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कह दिया है कि जब तक हमास के हथियार पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाते और पूरा इलाका डिमिलिटराइज नहीं हो जाता, तब तक इसराइली सेना वहां से पीछे नहीं हटेगी। इस तरह उन्होंने पहले की उन योजनाओं को खारिज कर दिया जिसमें हथियारों को छोड़ने और इसराइली सेना के धीरे-धीरे हटने की बात कही गई थी। विशेषज्ञों जैसे Suleiman Bisharat ने चिंता जताई है कि इन कमेटियों के बनने से इसराइल गाजा में अपना पुराना दबदबा फिर से कायम करने की कोशिश कर सकता है, जिससे राजनीतिक समाधान छोटे-छोटे स्थानीय मुद्दों में बंट कर रह जाएगा और पूरी ताकत बाहरी नियंत्रण में चली जाएगी।