अमेरिका ने ईरान के खिलाफ शुरू किया आर्थिक युद्ध, UAE भी उठाएगी बड़ा कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ी वित्तीय जंग का ऐलान किया है। उन्होंने इसे एक प्रकार का आर्थिक डी-डे बताया है, जो किसी भी देश पर अब तक का सबसे सख्त वित्तीय हमला है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के लिए मजबूर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल और गैस टैंकरों के लिए पूरी तरह से खोलना है। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE भी अमेरिका के साथ मिलकर व्यापार और वित्तीय प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है।
मैक्सिमम प्रेशर कैंपेन और अमेरिकी ट्रेजरी की चेतावनी
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी कि इस अधिकतम दबाव अभियान का मकसद बड़े पैमाने पर सैन्य संघर्ष से बचना है। इसके जरिए पूरी तरह से आर्थिक अलगाव पैदा करके ईरानी शासन को गिराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जो देश तेहरान के साथ व्यापार जारी रखेंगे, उन पर अमेरिकी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी पुष्टि की कि चल रहा संघर्ष अब आर्थिक युद्ध के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग 24 अगस्त 2026 को ईरान और उसके व्यावसायिक सहयोगियों के खिलाफ कुछ और नए उपायों की घोषणा करने वाला है।
हिजबुल्लाह पर प्रतिबंध और संघर्ष की स्थिति
अमेरिकी ट्रेजरी ने 20 अगस्त को हिजबुल्लाह को आधिकारिक तौर पर ईरान समर्थित प्रॉक्सी के रूप में फिर से नामित कर दिया। साथ ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC कुद्स फोर्स से जुड़े एक फंडिंग नेटवर्क पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए। यह फैसला लगभग छह महीने से चल रहे सक्रिय संघर्ष और हवाई हमलों के बाद आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना की मौजूदा ऑपरेशनल क्षमता अब अपनी सीमा तक पहुंच चुकी है और उसके पास मुख्य हथियारों का स्टॉक भी कम हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चीन का रुख
इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आई हैं। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इस अभियान को एक विफल नीति बताया और इसे अमेरिका के घरेलू कर्ज तथा ब्याज लागत से ध्यान भटकाने वाला करार दिया। उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने भी इसी तरह की बात कही। वहीं चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने 21 अगस्त को चेतावनी दी कि प्रतिबंधों से इस विवाद का समाधान नहीं निकलेगा और इसके बजाय कूटनीतिक रास्तों को अपनाया जाना चाहिए।