अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया है कि ईरान के खिलाफ उनके ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अब तक 6,000 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें (combat sorties) भरी जा चुकी हैं। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस भारी सैन्य अभियान में ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल साइट्स को काफी नुकसान पहुंचाया गया है।

ईरान के 6000 ठिकानों और 90 जहाजों पर बड़ा हमला

अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर करीब 6000 निशानों पर सटीक हमले किए हैं। इन हमलों में मुख्य रूप से ईरान की नौसेना और मिसाइल बनाने वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

  • ईरान के 90 से ज्यादा नौसैनिक जहाज तबाह या क्षतिग्रस्त कर दिए गए हैं, जिनमें 60 शिप और 30 माइन-लेयर शामिल हैं।
  • CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक, ‘सुलेमानी-क्लास’ के सभी युद्धपोत अब पूरी तरह बेकार हो चुके हैं।
  • पिछले 24 घंटों में हार्मूज जलडमरूमध्य के पास मौजूद मजबूत मिसाइल साइट्स पर 5000 पाउंड के ‘बंकर बस्टर’ बम गिराए गए हैं।

ईरान के बड़े नेताओं की मौत और आगे की योजना

हालिया हमलों में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और जनरल गुलामरेजा सुलेमानी (बासिज कमांडर) के मारे जाने की बात ईरानी मीडिया ने मान ली है। इसके अलावा बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के परिसर में भी एक प्रोजेक्टाइल गिरा है, लेकिन प्लांट को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है।

जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी इजरायल के तेल अवीव में रिहायशी इलाकों पर क्लस्टर बमों से हमला किया है। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि लगातार अमेरिकी हमलों के कारण ईरान के ड्रोन हमलों में 95 प्रतिशत और मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। अमेरिका ने आम नागरिकों को चेतावनी दी है कि सैन्य ठिकानों से दूर रहें, और अब अमेरिकी अधिकारी ईरान के मुख्य तेल टर्मिनल ‘खार्ग आइलैंड’ पर जमीनी ऑपरेशन करने पर भी विचार कर रहे हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.