अमेरिका की सेना ने ईरान पर किए जा रहे सैन्य हमलों को रोकने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। 27 जून 2026 को आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी ठिकानों पर होने वाले सैन्य ऑपरेशन अब पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। यह जानकारी US Army के हवाले से सऊदीन्यूज50 ने दी है।

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इन हमलों में US Air Force और Navy के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया था। अमेरिका ने मुख्य रूप से ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया जहाँ मिसाइल और ड्रोन रखे जाते थे। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और क़ेशम द्वीप (Qeshm Island) पर बने तटीय रडार साइट्स पर भी हमले किए गए।

हमले की वजह और आधिकारिक बयान

U.S. Central Command (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि ये हमले ईरानी सेना द्वारा कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमले का करारा जवाब थे। CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने मिसाइल स्टोरेज और रडार साइट्स पर हमला किया क्योंकि ईरान ने एक कमर्शियल जहाज को निशाना बनाया था।

इस मामले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने सीजफायर (युद्धविराम) समझौते का उल्लंघन किया है। वहीं, उपराष्ट्रपति JD Vance ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते पर साइन किए थे और अगर उन्हें कोई दिक्कत है, तो वे बातचीत का रास्ता चुन सकते हैं।

ईरान की प्रतिक्रिया और ताजा हालात

दूसरी तरफ, ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने भी जवाबी कार्रवाई में इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस कदम को संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर और दोनों देशों के बीच हुए समझौते का खुला उल्लंघन बताया है।

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद 25 जून 2026 को M/V Ever Lovely या Kiku नाम के कमर्शियल जहाज पर ड्रोन हमले के बाद शुरू हुआ। अमेरिकी सेना के 6 विमानों ने ईरान के तट और क़ेशम द्वीप पर मौजूद 4 ठिकानों पर हमला किया। ईरान की सरकारी मीडिया ने सिरिक शहर के पास धमाकों की खबर भी साझा की थी।