US Central Command (CENTCOM) ने ऐलान किया है कि उनके सैनिक खाड़ी क्षेत्र में पूरी तरह तैयार और अलर्ट मोड पर हैं। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है ताकि वहां आने-जाने वाले जहाजों पर सख्त नजर रखी जा सके। इस बड़े सैन्य कदम से पूरे इलाके में तनाव फैल गया है और समुद्री व्यापार पर गहरा असर पड़ा है।

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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाए हैं?

CENTCOM की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के समुद्री रास्तों पर पाबंदी लगा दी है। इस ऑपरेशन के तहत अब तक 38 जहाजों को वापस मोड़ा जा चुका है या उन्हें अपने पोर्ट पर लौटने का आदेश दिया गया है। इनमें 6 बड़े तेल टैंकर भी शामिल थे, जिनमें लगभग 1 करोड़ 5 लाख बैरल ईरानी तेल लदा था। इन जहाजों को Strait of Hormuz के जरिए वापस ईरान भेजा गया ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सेना की तैनाती कितनी बड़ी है?

अमेरिका ने इस समय क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत को बहुत बढ़ा दिया है। इसकी मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:

  • कुल 50,000 सैनिकों को तैनात किया गया है, जो इराक आक्रमण के बाद सबसे बड़ी तैनाती मानी जा रही है।
  • समुद्र में तीन बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln, USS Gerald R. Ford और USS George H.W. Bush को तैनात किया गया है।
  • इन जहाजों के साथ पूरी स्ट्राइक ग्रुप सपोर्ट मौजूद है, जिससे अमेरिकी हवाई और समुद्री ताकत काफी बढ़ गई है।

इस टकराव का आम लोगों और व्यापार पर क्या असर पड़ा है?

2026 के इस ईरान संघर्ष की वजह से भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार ईरान में कम से कम 3,375 और लेबनान में 2,509 लोगों की मौत हो चुकी है। इसराइल और लेबनान के बीच भी हमले जारी हैं। हालांकि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम की बात हुई थी, लेकिन समुद्र में हालात अब भी ठीक नहीं हैं। शिपिंग कंपनियां डर के कारण कम जहाज भेज रही हैं, जिससे खाड़ी में समुद्री आवाजाही बहुत कम हो गई है।