अमेरिका ने भारत से एक खास आग्रह किया है। अमेरिका चाहता है कि भारत समंदर में फंसा हुआ रूसी कच्चा तेल खरीदे ताकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को काबू में रखा जा सके। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन ने यह कदम उठाया है। इस फैसले के तहत वह रूसी तेल जो पहले चीन जाने वाला था, अब भारतीय रिफाइनरी की ओर मोड़ा जा रहा है।

अमेरिका ने भारत से ही क्यों किया यह आग्रह?

अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने बताया कि यह एक छोटी अवधि का और व्यावहारिक फैसला है। समंदर में लगभग 10 से 12 करोड़ बैरल रूसी तेल चीन के बंदरगाहों पर उतरने के लिए हफ्तों से इंतजार कर रहा था। अमेरिका का मानना है कि इस तेल को चीन की जगह भारत में उतारना ज्यादा तेज और आसान होगा। इससे ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी दूर होगी और अचानक से दाम बढ़ने का खतरा टल जाएगा।

  • चीन के बंदरगाहों पर तेल उतारने के लिए जहाजों को 6 हफ्ते तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा था।
  • हर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई प्रभावित होने के कारण अमेरिका ने इस तेल को भारत की ओर डायवर्ट करने का फैसला लिया।
  • ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार इससे रूस को कोई नया आर्थिक फायदा नहीं होगा क्योंकि यह तेल पहले ही जहाजों पर लोड किया जा चुका है।
  • अमेरिका ने माना है कि भारत इस स्थिति को संभालने के लिए एक बहुत जरूरी साझेदार है।

तेल खरीद के लिए क्या हैं नए नियम और शर्तें?

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने इस काम के लिए एक विशेष अस्थायी लाइसेंस जारी किया है। यह छूट केवल 30 दिनों के लिए दी गई है और इसके साथ कुछ खास शर्तें लागू की गई हैं ताकि प्रतिबंधों का उल्लंघन न हो।

  • लाइसेंस की अवधि: यह जनरल लाइसेंस 133 केवल 30 दिन के लिए है, जो 4 अप्रैल 2026 तक वैध रहेगा।
  • लोडिंग का समय: यह छूट सिर्फ उसी रूसी तेल पर लागू होगी जो 5 मार्च 2026 से पहले जहाजों पर लोड किया गया हो।
  • भारत की भूमिका: तेल की डिलीवरी सिर्फ भारत के किसी बंदरगाह पर होनी चाहिए और खरीदार कोई भारतीय कंपनी ही होनी चाहिए।

क्या अमेरिका की रूस नीति में हुआ है बदलाव?

अमेरिका के इस कदम के बाद भारत में राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है कि क्या यह फैसला किसी दबाव में लिया गया है। हालांकि, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने साफ किया कि अमेरिका की रूस पर प्रतिबंधों की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह सिर्फ 30 दिन का ब्रेक है ताकि समंदर में फंसे तेल के जहाजों को खाली किया जा सके और तेल की कीमतों को आसमान छूने से रोका जा सके। भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने भी घरेलू स्तर पर ईंधन की सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए इस तेल को स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com