समुद्री रास्तों पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब खतरनाक मोड़ ले चुकी है. अमेरिकी नौसेना के हमलों में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई है. इस घटना के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के राजनयिक को तलब किया है और इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है.

जहाजों पर हमले और भारतीय नाविकों की मौत

जून के महीने में ओमान के तट के पास तीन अलग-अलग कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए. 8 जून को MT Marivex नाम के जहाज पर हमला हुआ, जिसमें सवार सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों को ओमान के अधिकारियों ने सुरक्षित बचा लिया. इसके बाद 10 जून को MT Settebello नाम के तेल टैंकर पर हमला हुआ, जिसमें आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश नाम के तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई.

वहीं, 10 और 11 जून के बीच MT Jalveer नाम के जहाज पर अमेरिकी सेना ने हेलफायर मिसाइलें दागीं. यह हमला जहाज के इंजन रूम पर किया गया था. इस जहाज पर मौजूद 20 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें ओमान के शिनस पोर्ट पर पहुँचाया गया है.

भारत सरकार का सख्त एक्शन

भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर जेसन मीक्स को बुलाकर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इन मौतों को समुद्री परिवार के लिए एक बड़ी क्षति बताया. भारत ने तनाव को तुरंत कम करने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित आवाजाही की मांग की है.

इस समय खाड़ी क्षेत्र में 18,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं. भारत के शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक, 13 भारतीय जहाज इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे हुए हैं.

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती जंग

ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई को समुद्री डकैती और गैरकानूनी बताया है. इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी अल-अज़रक बेस पर 12 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए बंद कर दिया है, हालांकि अमेरिका ने इस दावे को नकारा है.

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हमलों की धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरान के तेल और गैस उद्योगों पर पूरी तरह नियंत्रण करेगा. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह सब अप्रैल से लागू की गई एक नौसैनिक नाकाबंदी का हिस्सा है, जिसका मकसद ईरान से जुड़े शिपिंग को रोकना है.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज़ ने इस स्थिति पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि नाविकों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली कोई भी कार्रवाई बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकती.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.