ओमान के समुद्र में अमेरिकी सेना के हमलों ने हड़कंप मचा दिया है। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई, जिससे भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे नाकाबिले बर्दाश्त बताया है।

क्या था पूरा मामला

घटनाओं की शुरुआत 8 जून 2026 को हुई जब अमेरिकी सेना ने MT Marivex नाम के टैंकर को रोका, जिसमें 24 भारतीय नाविक सवार थे। ओमान की नौसेना ने बाद में सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। लेकिन 10 जून को स्थिति गंभीर हो गई जब अमेरिका ने MT Settebello टैंकर पर हमला किया। इस हमले से जहाज में आग लग गई और तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। मरने वालों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश के रूप में हुई है। इसके बाद 11 जून को MT Jalveer नाम के एक और जहाज पर हमला किया गया, जिसमें 20 भारतीय चालक दल के सदस्य थे।

UN और भारत का कड़ा विरोध

UN प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस हमले की निंदा करता है और IMO के फैसले का पूरा समर्थन करता है। IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने इस घटना पर गहरा दुख जताया और कहा कि नाविकों की जान को खतरे में डालना बिल्कुल गलत है। उन्होंने इस मामले की पूरी और पारदर्शी जांच की मांग की है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को बहुत चिंताजनक बताया है। भारत ने अमेरिकी राजनयिक जेसन मीक्स को तीन दिनों के भीतर दो बार बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारतीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना को दुखद बताया और पुष्टि की कि मृतकों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

अमेरिका का दावा और विरोधाभास

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्वीकार किया है कि उनकी सेना ने ये हमले किए। उन्होंने कहा कि जहाजों ने अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन नहीं किया, इसलिए उनके इंजन रूम पर सटीक मिसाइलें दागी गईं। अमेरिका का दावा है कि वह ईरान से तेल के परिवहन को रोकने के लिए नाकाबंदी कर रहा था।

हैरानी की बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उनकी अपनी सेना ने हमलों की जिम्मेदारी ली है।