अमेरिका ने ईरान के सभी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है। व्हाइट हाउस के स्टीफन मिलर ने कहा कि अगर ईरान ने अपनी राह नहीं बदली और अमेरिका से डील नहीं की, तो वह दुनिया के लिए सिर्फ एक ‘फुटनोट’ बनकर रह जाएगा। इस बड़े कदम से वैश्विक राजनीति और ताकत के संतुलन में बड़ा बदलाव आया है।

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अमेरिका ने ईरान के पोर्ट्स क्यों बंद किए और अब क्या स्थिति है?

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत जब नाकाम रही, तो राष्ट्रपति Donald Trump ने 12 अप्रैल 2026 को नौसैनिक घेराबंदी का ऐलान किया। सोमवार 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय इलाकों को ब्लॉक कर दिया गया। US Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, 36 घंटे के अंदर ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह रुक गया है। हालांकि, Strait of Hormuz से गुजरने वाले दूसरे देशों के जहाजों को रास्ता दिया जा रहा है।

इस विवाद पर ईरान और अन्य देशों का क्या रिएक्शन है?

ईरान ने अमेरिका के इस कदम को गैरकानूनी बताया है और इसे समुद्री डकैती कहा है। ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि अगर उनके पोर्ट सुरक्षित नहीं रहे, तो खाड़ी के किसी भी बंदरगाह को सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा। वहीं, यूनाइटेड किंगडम की एजेंसी UKMTO ने भी नाविकों के लिए नोटिस जारी कर ईरान के पूरे तट और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर पाबंदियों की पुष्टि की है। पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच दोबारा शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहा है।

तारीख महत्वपूर्ण घटना
12 अप्रैल 2026 Trump ने घेराबंदी का ऐलान किया
13 अप्रैल 2026 ईरान के सभी पोर्ट्स ब्लॉक हुए
14 अप्रैल 2026 CENTCOM ने घेराबंदी पूरी होने की पुष्टि की
14 अप्रैल 2026 स्टीफन मिलर ने ईरान को ‘फुटनोट’ कहा
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.