अमेरिका की तरफ से ईरान के बंदरगाहों की गई नाकाबंदी का असर अब साफ़ दिखने लगा है। US Central Command (CENTCOM) ने जानकारी दी है कि Strait of Hormuz में अब तक 84 कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा। यह खबर Kuwait News Agency (KUNA) ने साझा की है, जिससे पता चलता है कि समुद्री व्यापार में कितनी बड़ी हलचल मची हुई है।
कितने जहाजों पर पड़ा असर और क्या है ताजा अपडेट?
US Central Command के आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी के बाद जहाजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 18 मई 2026 तक यह संख्या 84 तक पहुँच गई है। इससे पहले 16 मई को 78 जहाजों और 14-15 मई के बीच 70 से 72 जहाजों के रास्ता बदलने की खबर आई थी। यह पूरी नाकाबंदी 13 अप्रैल 2026 से लागू है, जिससे दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों को परेशानी हो रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच इस विवाद की असल वजह क्या है?
यह विवाद तब बढ़ा जब इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता असफल रही। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान को टोल के ज़रिए मुनाफा कमाने से रोकना चाहता है और समुद्र में नेविगेशन की आज़ादी बहाल करना चाहता है। Admiral Brad Cooper ने बताया कि Operation Epic Fury के ज़रिए ईरान की 90 प्रतिशत से ज़्यादा नेवल माइन्स को नष्ट कर दिया गया है। दूसरी तरफ, ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनिज़ादेह ने कहा है कि अब वे अपने सामान की सप्लाई के लिए उत्तरी बंदरगाहों और ज़मीनी रास्तों का इस्तेमाल करेंगे।
इस नाकाबंदी से दुनिया और कानून पर क्या असर पड़ रहा है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई UNCLOS के आर्टिकल 44 का उल्लंघन है, जो अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में आवाजाही रोकने से मना करता है। इस मुद्दे पर दुनिया के बड़े देशों के बीच भी चर्चा हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बात पर सहमति जताई कि Strait of Hormuz को खुला रहना चाहिए। चीन ने पहले ही इस नाकाबंदी की आलोचना की थी और इसे नेविगेशन की आज़ादी के खिलाफ बताया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz में जहाजों का रास्ता क्यों बदला गया?
US Central Command ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की है। इस वजह से 84 कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा ताकि वे इस सैन्य तनाव से बच सकें।
ईरान अब अपने सामान की सप्लाई कैसे कर रहा है?
ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री ने बताया है कि दक्षिणी बंदरगाहों पर नाकाबंदी के कारण अब सामान की सप्लाई के लिए उत्तरी बंदरगाहों और ज़मीनी सीमाओं का इस्तेमाल किया जाएगा।
