अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि उन्होंने ईरान के अंदर लगभग 6,000 ठिकानों पर हमले किए हैं। यह सैन्य अभियान 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था जिसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का नाम दिया गया है। युद्ध के कारण मध्य पूर्व के देशों में काफी तनाव बढ़ गया है जिसका सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और यात्रियों पर भी पड़ रहा है।

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सऊदी और दुबई में रहने वाले प्रवासियों पर क्या है असर

खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों के लिए इस युद्ध का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक ड्रोन हमला हुआ है जिसके कारण फ्यूल टैंक में आग लग गई और कई फ्लाइट्स के समय में बदलाव किया गया है। दूसरी तरफ सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने भी पूर्वी प्रांत और रियाद के ऊपर लगभग 63 ईरानी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है। सऊदी सरकार ने नागरिकों और प्रवासियों की सुरक्षा के लिए Tawakkalna app में एक नया अलर्ट फीचर जोड़ा है जो किसी भी हवाई खतरे की जानकारी तुरंत लोगों तक पहुंचाएगा।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की स्थिति

इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण समुद्री रास्ते भी काफी प्रभावित हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षा कारणों से पूरी तरह बंद कर दिया गया है जिससे कमर्शियल जहाजों की आवाजाही रुक गई है। नीचे युद्ध से जुड़े कुछ मुख्य आधिकारिक आंकड़े दिए गए हैं:

  • कुल हमले: अमेरिका ने अब तक ईरान के अंदर 6,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है।
  • समुद्री नुकसान: ईरान के लगभग 90 जहाजों को नष्ट या क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।
  • नई तैनाती: अमेरिका ने मध्य पूर्व में समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए 2,500 अतिरिक्त Marines की तैनाती शुरू कर दी है।
  • विस्थापन: इस युद्ध की वजह से ईरान में लगभग 32 लाख लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं।
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.