मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण मुलाकात की है। US Central Command (CENTCOM) के चीफ एडमिरल Brad Cooper ने इजरायल में IDF चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल Eyal Zamir और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब खबरें आ रही हैं कि पेंटागन ईरान में जमीनी ऑपरेशन के लिए योजनाएं तैयार कर रहा है। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य ईरान की हथियार उत्पादन क्षमता को सीमित करना और वर्तमान सुरक्षा हालातों पर काबू पाना है।

📰: Flyadeal Flight Update: सऊदी अरब की एयरलाइन ने रद्द की उड़ानें, दुबई और अम्मान जाने वालों के लिए आया नया अपडेट

क्या अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करने वाला है?

पेंटागन द्वारा ईरान में जमीनी ऑपरेशन की योजना बनाने की खबरों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। बताया जा रहा है कि यह योजना कुछ हफ्तों के जमीनी ऑपरेशन की हो सकती है, जिसमें पैदल सेना और विशेष बल शामिल हो सकते हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा है कि पेंटागन की जिम्मेदारी राष्ट्रपति को सभी विकल्प देना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जमीनी सेना भेजने का फैसला हो चुका है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी साफ किया कि अमेरिका बिना जमीनी सेना भेजे भी अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकता है।

क्षेत्र में हुए हालिया हमले और सुरक्षा की स्थिति

पिछले 24 से 48 घंटों में खाड़ी देशों और आसपास के इलाकों में कई बड़ी सैन्य घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

तारीख घटना का विवरण
27 मार्च 2026 सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हमला हुआ, जिसमें 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए।
28 मार्च 2026 यमन के हूती गुट ने इजरायल की तरफ मिसाइल और ड्रोन से हमला किया।
29 मार्च 2026 IRGC ने बहरीन और UAE में औद्योगिक ठिकानों पर मिसाइल हमले का दावा किया।
29 मार्च 2026 UAE ने ईरान की ओर से आने वाली 16 मिसाइलों और 42 ड्रोन को सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट किया।

ईरान के संसद अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई की, तो उनके सैनिक कड़ा जवाब देने के लिए तैयार हैं। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि सैन्य कार्रवाई से ईरान की सरकार में दरारें दिखने लगी हैं। इस स्थिति का असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है, क्योंकि दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी और हमले तेज हो गए हैं।