अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ऐलान किया है कि उसकी सेनाएं किसी भी ईरानी आक्रामकता का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अमेरिकी सेना ने न सिर्फ ईरान के 4 घातक ड्रोन मार गिराए हैं, बल्कि उसके रडार ठिकानों पर भी हमला किया है। खाड़ी देशों में चल रहे इस तनाव से दुनिया भर के लोग और प्रवासी चिंतित हैं क्योंकि इसका सीधा असर समुद्री रास्तों और सुरक्षा पर पड़ रहा है।
अमेरिकी सेना ने ईरान के ड्रोन मार गिराए और रडार किए तबाह
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उनके बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की तरफ भेजे गए ईरान के चार हमलावर ड्रोन को मार गिराया है। इन ड्रोनों को समुद्री यातायात के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा था। इस घटना के तुरंत बाद अमेरिकी बलों ने सुरक्षा के लिए गोरुक और केश्म द्वीप पर मौजूद ईरानी तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर सीधे हमले किए और उन्हें नष्ट कर दिया।
ईरान की नौसेना ने दावा किया था कि उसने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोतों को चेतावनी देने के लिए मिसाइलें और ड्रोन दागे थे, जिसके बाद अमेरिकी जहाज पीछे हट गए। अमेरिकी सेना ने ईरान के इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और कहा है कि उनके बल बिना किसी रुकावट के इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं और नाकेबंदी को कड़ाई से लागू कर रहे हैं।
70 से ज्यादा तेल टैंकरों की नाकेबंदी और ईरान को भारी आर्थिक नुकसान
अमेरिकी सेना की नाकेबंदी के कारण ईरान को बहुत बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की रिपोर्ट के अनुसार, 70 से अधिक तेल टैंकरों को ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने से रोक दिया गया है। इन टैंकरों में लगभग 16.6 करोड़ बैरल ईरानी तेल है, जिसकी कीमत 13 अरब डॉलर से भी ज्यादा है।
- ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury): यह अमेरिका और इजरायल का संयुक्त सैन्य अभियान है, जो 28 फरवरी 2026 को ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए शुरू किया गया था।
- 90 प्रतिशत सैन्य क्षमता नष्ट: अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि 38 दिनों के हवाई हमलों के कारण ईरान की 90 प्रतिशत सैन्य औद्योगिक क्षमता और समुद्री बारूदी सुरंगों का भंडार खत्म हो चुका है।
- प्रॉक्सी संगठनों की सप्लाई बंद: अमेरिकी कार्रवाई के बाद से हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों को मिलने वाले ईरानी हथियारों की सप्लाई लाइन पूरी तरह कट गई है।
दूसरी तरफ, ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार ने कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत पूरी तरह से बंद हो चुकी है। उन्होंने अमेरिका से ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को छोड़ने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर नाकेबंदी जारी रही तो अमेरिकी ठिकानों पर हमले और तेज किए जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यह विवाद जल्द ही किसी समझौते के जरिए या फिर एक कड़े सैन्य कदम के साथ समाप्त हो जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिकी नौसेना के जहाज ईरानी हमलों के डर से पीछे हटे हैं?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके बल बिना किसी डर या बाधा के क्षेत्रीय समुद्री सीमा में अपनी गश्त और नाकेबंदी जारी रखे हुए हैं।
ईरान को अमेरिकी नाकेबंदी से कितना नुकसान हुआ है?
इस नाकेबंदी के कारण ईरान के 70 से अधिक तेल टैंकर फंसे हुए हैं, जिनमें लगभग 13 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का 16.6 करोड़ बैरल तेल मौजूद है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह अमेरिका और इजरायल का एक संयुक्त अभियान है, जिसका उद्देश्य ईरान के सुरक्षा तंत्र को कमजोर करना और क्षेत्र में सुरक्षा खतरों को समाप्त करना है।
