US CENTCOM का सख्त एक्शन, ईरान के खिलाफ घेराबंदी में 48 कमर्शियल जहाजों को मोड़ा गया

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने हाल ही में ईरान के खिलाफ जारी अपनी समुद्री घेराबंदी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। 5 अगस्त 2026 को जारी जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने अब तक कुल 48 कमर्शियल जहाजों को उनके रास्ते से मोड़ा है। इस अभियान के दौरान अमेरिकी सेना ने दो जहाजों को निष्क्रिय किया और दो अन्य जहाजों पर बोर्डिंग की कार्रवाई की। इस दौरान इलाके में गश्त कर रहे एक F-16 लड़ाकू विमान में हवा में ईंधन भरने की प्रक्रिया भी देखी गई। यह संख्या लगातार बढ़ रही है, क्योंकि 4 अगस्त को यह आंकड़ा 45 जहाजों का था और 2 अगस्त को 35 जहाज प्रभावित हुए थे।
समुद्री नाकेबंदी और वर्तमान स्थिति
अमेरिका ने 14 जुलाई 2026 को ईरान के बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक घेराबंदी को फिर से लागू किया था। यह कदम एक संघर्ष विराम समझौते के विफल होने के बाद उठाया गया। असल में, यह नाकेबंदी 13 अप्रैल 2026 को शुरू हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी से जुड़े ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों में आने-जाने वाले समुद्री यातायात को नियंत्रित करना था। CENTCOM का कहना है कि यह कार्रवाई निष्पक्ष है और इससे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले उन जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं आती, जो ईरान के बंदरगाहों पर नहीं जा रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के दायरे में है, जबकि ईरान ने इसे अवैध करार दिया है।
ईरान और अमेरिका के बीच खींचतान
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने कहा कि ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले शिपिंग रूट के लिए भौगोलिक निर्देशांक यानी कोऑर्डिनेट्स पर सहमति बना ली है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रूट को दोबारा खोलने का फैसला तभी होगा जब अमेरिका अपनी नौसैनिक घेराबंदी को पूरी तरह समाप्त कर देगा। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए समझौता आज या कल में हो सकता है, क्योंकि उन्होंने इस दिशा में काफी प्रगति होने की बात कही है।
इन सब बातों के बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार Mojtaba Khamenei ने 4 अगस्त को एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ईरान इस घेराबंदी को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगा और होर्मुज में किसी भी तरह के दूसरे कॉरिडोर यानी वैकल्पिक रास्ते को अनुमति नहीं दी जाएगी। क्षेत्र में जारी इस तनाव का असर समुद्री व्यापार पर लगातार बना हुआ है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां कारोबार करने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल है क्योंकि इससे सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ता है।