अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी है कि ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी की वजह से अब तक 49 कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। 2 मई को यह संख्या 45 थी, जो अब बढ़कर 49 हो गई है। इस सैन्य कार्रवाई से समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ रहा है और क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है।

ईरान की नाकाबंदी कब और कैसे शुरू हुई?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी शुरू हुई थी। यह फैसला इस्लामाबाद में शांति वार्ता विफल होने के बाद लिया गया। CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि यह नाकाबंदी उन सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी जो ईरान के बंदरगाहों या तटीय क्षेत्रों में जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। हालांकि, जो जहाज केवल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरकर किसी दूसरे देश के पोर्ट जा रहे हैं, उन्हें नहीं रोका जाएगा।

तेल व्यापार और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा?

इस नाकाबंदी की वजह से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। एडमिरल कूपर के मुताबिक, ईरान के 41 तेल टैंकर इस समय फंसे हुए हैं, जिनमें करीब 69 मिलियन बैरल तेल है। इस तेल की कुल कीमत 6 अरब डॉलर से ज्यादा है, जिसे ईरान अभी बेच नहीं पा रहा है। सुरक्षा के मोर्चे पर भी हालात खराब हैं। 3 मई को एक बल्क कैरियर जहाज पर छोटे जहाजों ने हमला किया, हालांकि गनीमत यह रही कि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित थे।

ईरान का जवाब और शांति की कोशिशें

अमेरिका की इस कार्रवाई के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को विदेशी जहाजों के लिए बंद कर दिया है और कुछ कमर्शियल जहाजों को जब्त भी किया है। ईरान की क्रांतिकारी गार्ड कोर (IRGC) ने चेतावनी दी है कि सैन्य टकराव फिर से बढ़ सकते हैं। वहीं, तनाव कम करने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें सबसे मुख्य मांग इस समुद्री नाकाबंदी को खत्म करने की है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका की नाकाबंदी से अब तक कितने जहाजों पर असर पड़ा है?

CENTCOM के मुताबिक 3 मई 2026 तक कुल 49 कमर्शियल जहाजों को नाकाबंदी के नियमों का पालन करने के लिए अपना रास्ता बदलना पड़ा।

ईरान को इस नाकाबंदी से कितना आर्थिक नुकसान हुआ है?

ईरान के 41 टैंकर फंसे हुए हैं जिनमें करीब 69 मिलियन बैरल तेल है, जिसकी बाजार कीमत 6 अरब डॉलर से अधिक है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com