अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी है। 22 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार अमेरिकी सेना ने तेहरान के पास स्थित एक प्रमुख मिसाइल उत्पादन केंद्र को निशाना बनाया है। इस हमले के बाद CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो भी जारी किया है जिसमें मिसाइल बेस के तबाह होने के दृश्य दिखाए गए हैं।

अमेरिकी हमले के बारे में मुख्य जानकारी क्या है?

अमेरिकी सेना की तरफ से बताया गया है कि उन्होंने Qods-e Bergemali बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण केंद्र पर सटीक हमला किया है। यह सैन्य केंद्र तेहरान के बाहरी हिस्से में स्थित है और इसका इस्तेमाल कम और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने के लिए होता था। सेना के मुताबिक 1 मार्च और 7 मार्च को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ये इमारतें अब काम करने की स्थिति में नहीं बची हैं। एडमिरल ब्रैड कूपर ने साफ किया कि अमेरिकी सेना का मुख्य मकसद ईरान की मिसाइल और ड्रोन बनाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है ताकि वह भविष्य में इसका इस्तेमाल न कर सके।

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अब तक की कार्रवाई

अमेरिकी सेना पिछले कुछ समय से ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के जरिए ईरान के कमांड सेंटर्स और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बना रही है। एडमिरल कूपर ने बताया कि सेना ने ईरान के तटीय इलाकों में उन ठिकानों को भी नष्ट किया है जहां एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें रखी गई थीं। इन हमलों में भारी वजन वाले बमों का इस्तेमाल हुआ है ताकि जमीन के अंदर गहराई में बने ठिकानों को भी नुकसान पहुंचाया जा सके।

तारीख घटनाक्रम
22 मार्च 2026 CENTCOM ने मिसाइल बेस पर हमले का वीडियो जारी किया
21 मार्च 2026 एडमिरल कूपर ने सैन्य क्षमता कम होने की पुष्टि की
7 मार्च 2026 मिसाइल सेंटर की इमारतों के पूरी तरह बंद होने की खबर आई
28 फरवरी 2026 अलहयात बेस पर अमेरिकी और इजरायली सेना का हमला हुआ

क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस सैन्य कार्रवाई से ईरान की सैन्य शक्ति पर गहरा असर पड़ा है। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान की उस क्षमता को निशाना बना रहे हैं जिसके जरिए वह ताकत का प्रदर्शन करता है। स्थानीय स्तर पर सऊदी न्यूज चैनलों ने भी इस हमले की पुष्टि की है और इसे क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम बताया है।