अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड CENTCOM ने जानकारी दी है कि 22 जुलाई 2026 की देर रात ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर लगातार 12वीं रात हमले किए गए। ये ऑपरेशन 23 जुलाई की सुबह तक जारी रहे। इस दौरान अमेरिका ने ईरान की समुद्री क्षमताओं, मिसाइल और ड्रोन स्टोर करने वाली जगहों के साथ-साथ तटीय निगरानी केंद्रों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया है।
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हमलों का मुख्य कारण
अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद उन सैन्य संपत्तियों को खत्म करना है जिनसे खाड़ी के इलाकों में समुद्री यात्रियों और व्यापारिक जहाजों को खतरा था। 14 जुलाई से जारी इस नेवल ब्लॉकेड के तहत CENTCOM ने अब तक 9 कमर्शियल जहाजों को रास्ता बदलने पर मजबूर किया है और एक जहाज को निष्क्रिय कर दिया है। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी Tasnim के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित Larak द्वीप पर अमेरिकी मिसाइल हमला हुआ है।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और सैन्य नुकसान
इस संघर्ष के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दो तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया है। साथ ही, Kuwait में सुरक्षा प्रणालियों ने ईरान से आए ड्रोन को हवा में मार गिराया है। तनाव इतना बढ़ गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि होर्मुज में हर हमले के बदले ईरान का एक पावर प्लांट या पुल नष्ट किया जाएगा। वहीं, ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी ‘जैसे को तैसा’ वाली नीति अपनाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया देने की बात कही है। इस सैन्य संघर्ष में 28 फरवरी 2026 से अब तक 18 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं, जिनमें 22 जुलाई को इरबिल एयर बेस पर और 17 जुलाई को जॉर्डन के मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस पर हुई घटनाएं शामिल हैं।
