मिडिल ईस्ट में हालात काफी गंभीर हो गए हैं। U.S. Central Command (CENTCOM) ने जानकारी दी कि 18 जुलाई को लगातार आठवीं रात ईरान पर हवाई हमले किए गए। राष्ट्रपति के आदेश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस कार्रवाई में ईरान के कोस्टल सर्विलांस, एयर डिफेंस, नेवल क्षमता और मिसाइल व ड्रोन रखने वाले गोदामों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है।
क्यों हो रहे हैं ये हमले
अमेरिकी सेना के मुताबिक, ये हमले 17 जुलाई को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए किए गए हैं। इन हमलों में दो अमेरिकी सैनिक शहीद हुए और एक अभी भी लापता है। साथ ही, चार सैनिकों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अमेरिका ने ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को इन हमलों का जिम्मेदार ठहराया है। मिडिल ईस्ट में अभी 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और वे पूरी तरह सतर्क हैं।
ईरान और कुवैत पर असर
ईरान के IRGC ने दावा किया है कि उन्होंने जॉर्डन में अमेरिकी बेस और कुवैत में Camp Arifjan पर हमले किए हैं। ईरान ने दावा किया कि उनके हमलों से अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुँचा है। कुवैत के अधिकारियों ने बताया कि उनके यहाँ बिजली संयंत्र और डीसेलिनेशन प्लांट को नुकसान हुआ है। ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ईरान ने Strait of Hormuz को भी बंद कर दिया है, जिससे समुद्री व्यापार पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।
अब तक का नुकसान
युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 16 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं और 430 से ज्यादा घायल हुए हैं। दूसरी तरफ, ईरान के सरकारी टीवी के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में तीन लोगों की मौत हुई है और आठ लोग घायल हुए हैं। पिछले तीन हफ्तों में ईरान ने 50 लोगों की मौत और 500 से ज्यादा लोगों के घायल होने का दावा किया है।
