अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर बड़े स्तर पर हमले किए हैं। यह सैन्य कार्रवाई 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई थी जिसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया है। अमेरिकी सेना ने तेहरान, इस्फ़हान और शिराज जैसे प्रमुख शहरों में 1250 से ज़्यादा जगहों को निशाना बनाया है। इस संघर्ष की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों में तेज़ी आई है जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।

किन हथियारों का हुआ इस्तेमाल और क्या है नुकसान

इस ऑपरेशन में पहली बार अमेरिका ने LUCAS नाम के आत्मघाती ड्रोन और B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया है। अमेरिकी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई में अब तक छह अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह हमले ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करने के लिए किए गए हैं ताकि भविष्य के खतरों को रोका जा सके।

खाड़ी देशों और प्रवासियों पर हमले का असर

  • हवाई यात्रा: खाड़ी क्षेत्र का हवाई रास्ता बंद होने की वजह से हज़ारों यात्री फंसे हुए हैं और सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई हैं।
  • महंगाई: कतर एनर्जी ने अपना उत्पादन रोक दिया है जिससे आने वाले दिनों में एलएनजी और पेट्रोल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • सुरक्षा अलर्ट: दुबई एयरपोर्ट, बहरीन और कुवैत के कुछ बुनियादी ढांचों पर भी जवाबी रॉकेट गिरने की खबरें आई हैं।
क्षेत्र प्रमुख प्रभाव
दुबई एयरपोर्ट और पोर्ट के पास सुरक्षा अलर्ट
कतर गैस उत्पादन पूरी तरह सस्पेंड
ईरान तेहरान और इस्फ़हान में सैन्य ठिकाने तबाह
ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

अमेरिकी रक्षा मंत्री पेट हेगसेथ ने बताया कि यह मिशन ईरान के खतरनाक मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने के लिए है। वहीं संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय दूतावास के संपर्क में रहें और यात्रा संबंधी अपडेट्स देखते रहें।