11 मार्च 2026 को US Central Command (CENTCOM) ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ईरानी नौसेना ने Strait of Hormuz के पास कमर्शियल नेविगेशन के लिए बने सिविलियन पोर्ट्स के अंदर अपने जहाज और सैन्य उपकरण तैनात कर दिए हैं। अमेरिकी सेना ने बताया है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को भारी नुकसान हो सकता है और आम लोगों की जान खतरे में है।

कमर्शियल पोर्ट्स पर सैन्य तैनाती का क्या है असर

अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार अगर किसी सिविलियन जगह का इस्तेमाल सैन्य कामों के लिए होता है, तो वह अपनी सुरक्षा खो देता है और उसे सैन्य टारगेट माना जाता है। इसी को देखते हुए CENTCOM ने पोर्ट्स पर काम करने वाले लोगों के लिए एक जरूरी आदेश जारी किया है।

  • पोर्ट्स पर काम करने वाले डॉकवर्कर्स और एडमिनिस्ट्रेशन के लोगों को ईरानी जहाजों से दूर रहने को कहा गया है।
  • कमर्शियल जहाजों के क्रू मेंबर्स को भी सैन्य उपकरणों से दूरी बनाने की सलाह दी गई है।
  • CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार फरवरी 2026 के अंत से अब तक लगभग 60 ईरानी जहाजों को नष्ट किया जा चुका है।

अमेरिका ने साफ किया है कि ईरानी शासन आम नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि अमेरिकी सेना आम लोगों को बचाने की पूरी कोशिश करेगी, लेकिन सैन्य ठिकानों के पास सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती है।

दुबई एयरपोर्ट पर हमला और तेल की सप्लाई पर असर

इस सैन्य तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। अमेरिका द्वारा बंदर अब्बास पोर्ट पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है।

  • ईरान ने फारस की खाड़ी में मौजूद कमर्शियल जहाजों और दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Dubai International Airport) पर ड्रोन से हमले किए हैं।
  • Strait of Hormuz में तेल टैंकरों की आवाजाही पर रोक लग गई है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई होता है।
  • समुद्री रास्तों को खुला रखने के लिए अमेरिकी सेना लगातार ईरानी माइन-लेइंग जहाजों को नष्ट कर रही है।

इस पूरे मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (U.N. Security Council) में भी एक प्रस्ताव पर वोटिंग होने वाली है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है ताकि सिविलियन पोर्ट्स के इस्तेमाल को रोका जा सके।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.