US Central Command ने ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमले किए हैं. यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई. अमेरिका का कहना है कि इस ऑपरेशन का मकसद ईरान सरकार को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करना है.
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यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब क्षेत्र में नागरिक जहाजों को निशाना बनाया गया. 25 जून को सिंगापुर के जहाज M/V Ever Lovely पर ड्रोन हमला हुआ. इसके बाद 27 जून को पनामा के टैंकर M/T Kiku को निशाना बनाया गया. इस टैंकर में 20 लाख बैरल से ज़्यादा कच्चा तेल था और हमले में इसके ब्रिज को नुकसान पहुँचा, हालांकि चालक दल सुरक्षित रहा और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हुआ.
अमेरिका ने किन ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेना ने ईरान के उन ठिकानों पर हमला किया जहाँ सैन्य निगरानी का बुनियादी ढांचा, संचार प्रणाली और हवाई रक्षा साइटें मौजूद थीं. इसके अलावा ड्रोन स्टोरेज और तटीय रडार साइटों को भी निशाना बनाया गया. राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की इन हरकतों को एक समझौते का मूर्खतापूर्ण उल्लंघन बताया और कहा कि यह हमला बेवजह की आक्रामकता को रोकने के लिए ज़रूरी था.
ईरान का क्या है कहना
दूसरी तरफ, ईरान ने दावा किया कि जिन व्यापारिक जहाजों पर हमला हुआ, वे खाड़ी के जलमार्ग में बिना अनुमति के गलत रास्तों का इस्तेमाल कर रहे थे. ईरानी अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि दक्षिणी ईरान के Sirik में एक घाट (pier) पर मिसाइल गिरी, जिसके बाद ईरानी नौसेना ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की. अब IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने अमेरिकी हमलों का बदला लेने के लिए और ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं.
