अमेरिकी सेना ने जून 2026 में ईरान के मिलिट्री ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम पर कई बड़े हमले किए। US Central Command (CENTCOM) के मुताबिक ये कार्रवाई ईरान की आक्रामकता के जवाब में और आत्मरक्षा के लिए की गई। इन हमलों में ईरान के निगरानी सिस्टम और संचार माध्यमों को निशाना बनाया गया।

हमलों का पूरा विवरण

CENTCOM ने बताया कि यह पूरा अभियान जून के महीने में अलग-अलग चरणों में चला। अमेरिकी सेना ने सटीक हथियारों का इस्तेमाल करके ईरान की सैन्य क्षमताओं को चोट पहुँचाई।

  • 5 जून 2026: Strait of Hormuz में ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के बाद अमेरिका ने Goruk और Qeshm द्वीपों पर मौजूद रडार ठिकानों को नष्ट किया।
  • 9 जून 2026: 8 जून को एक अमेरिकी Apache हेलीकॉप्टर गिराए जाने के जवाब में CENTCOM ने एयर डिफेंस और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों पर हमले किए। इसमें वायु सेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया।
  • 10 जून 2026: ईरान के कई हिस्सों में मिलिट्री निगरानी क्षमताओं और संचार प्रणालियों को निशाना बनाया गया। इस ऑपरेशन में US Marine Corps, Air Force और Navy के हथियारों का उपयोग हुआ।
  • 26 जून 2026: एक कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद अमेरिका ने फिर कार्रवाई की। इस बार ड्रोन स्टोरेज और माइललेयर (mines लगाने वाले सिस्टम) को तबाह किया गया।

ईरान की प्रतिक्रिया और अन्य देशों पर असर

इन हमलों के बाद ईरान के पश्चिमी Tehran, Sirik और Minab जैसे शहरों में धमाकों की खबरें आईं। जवाब में ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने जॉर्डन के al-Azraq एयरबेस, बहरीन और कुवैत के अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। कुवैत की सेना ने जानकारी दी कि उनके डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को हवा में ही रोक लिया।

CENTCOM ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह सतर्क और तैयार है। अधिकारियों ने बताया कि ईरान को युद्धविराम समझौते का सम्मान करने का मौका दिया गया था, लेकिन जहाज पर हमला करके उसने इसे ठुकरा दिया। 27 जून को CENTCOM ने इन सभी हमलों के फुटेज भी जारी किए।