संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 जुलाई 2026 को ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक झड़प देखने को मिली। अमेरिकी दूत Mike Waltz ने ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और चीन की कुछ कंपनियों पर ईरान को सैन्य सामान भेजने का आरोप मढ़ा। वहीं, चीनी राजदूत Sun Lei ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के हालिया सैन्य हमलों ने पूरे क्षेत्र को खतरे में डाल दिया है।

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तनाव की मुख्य वजह

यह विवाद 14 जुलाई 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद शुरू हुआ। Mike Waltz ने कहा कि ईरान और चीन की कुछ कंपनियां हूतियों को हथियार और सैटेलाइट तस्वीरें मुहैया करा रही हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का धैर्य अब खत्म हो रहा है।

चीन और ईरान का जवाब

चीनी राजदूत ने स्पष्ट किया कि चीन अपने निर्यात पर कड़ाई से नियंत्रण रखता है और क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और युद्ध के प्रसार को रोकने की अपील की है। उधर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष जारी रहा, तो वे खाड़ी में तेल और गैस के रास्तों को निशाना बना सकते हैं। स्थिति यह है कि Donald Trump ने होर्मुज में ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है और ट्रांजिट जहाजों पर 20 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की संभावना जताई है।

Sushma Kumari

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