अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच बीजिंग में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन हुआ. 14 और 15 मई 2026 को हुई इस मीटिंग में व्यापार, ताइवान और ईरान में चल रहे युद्ध जैसे बड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. दोनों देशों ने व्यापार को लेकर तो सहमति जताई लेकिन ताइवान और ईरान के मुद्दे पर रुख अलग रहा.

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ताइवान मुद्दे पर चीन की चेतावनी और अमेरिका का जवाब

चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping ने अमेरिकी राष्ट्रपति को चेतावनी दी कि अगर ताइवान के मामले को ठीक से नहीं संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव या संघर्ष हो सकता है. उन्होंने ताइवान को चीन और अमेरिका के रिश्तों का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने 14 मई को साफ किया कि ताइवान के प्रति अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. Rubio ने कहा कि चीन द्वारा ताइवान के खिलाफ किसी भी तरह के बल का प्रयोग करना एक बहुत बड़ी गलती होगी.

ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्या बात हुई

चीन के विदेश मंत्रालय ने 15 मई को एक बयान जारी किया जिसमें अमेरिका और ईरान से युद्धविराम करने और Strait of Hormuz को फिर से खोलने की अपील की गई. चीन का कहना था कि यह युद्ध शुरू ही नहीं होना चाहिए था और अब इस संघर्ष को जारी रखने का कोई मतलब नहीं है. राष्ट्रपति Trump ने बताया कि राष्ट्रपति Xi ने वादा किया है कि चीन ईरान को कोई सैन्य उपकरण नहीं देगा. ट्रंप ने ईरान के 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया क्योंकि उसमें परमाणु मुद्दे शामिल थे. दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि दुनिया में ऊर्जा की सप्लाई के लिए Strait of Hormuz को खुला रखना जरूरी है.

व्यापार समझौतों और आर्थिक रिश्तों पर अपडेट

इस मीटिंग के दौरान अमेरिका का मुख्य लक्ष्य व्यापारिक समझौतों में जीत हासिल करना था. दोनों देशों ने आपसी व्यापारिक मतभेदों को सुलझाने के लिए एक ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाने पर चर्चा की. चीन ने संकेत दिए कि वह व्यापार के अवसर बढ़ाएगा, जिसमें अमेरिका से कृषि उत्पादों और ऊर्जा की खरीद शामिल हो सकती है. इस समिट में Nvidia के CEO Jensen Huang जैसे बड़े बिजनेस लीडर्स भी शामिल हुए.

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर क्या तनाव है?

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और राष्ट्रपति Xi ने चेतावनी दी है कि गलत कदम से युद्ध हो सकता है, जबकि अमेरिका ने कहा है कि उसकी नीति नहीं बदलेगी और बल प्रयोग गलत होगा.

ईरान युद्ध को रोकने के लिए चीन और अमेरिका ने क्या तय किया?

चीन ने युद्धविराम की मांग की है और राष्ट्रपति Xi ने ईरान को सैन्य मदद न देने का वादा किया है, जबकि ट्रंप ने परमाणु मुद्दों के कारण ईरान के शांति प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है.