Hormuz Strait के बंद होने से पूरी दुनिया में तेल और व्यापार की चिंता बढ़ गई है. हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच बीजिंग में एक अहम मीटिंग हुई. इस मीटिंग में रास्ते को खोलने पर चर्चा तो हुई, लेकिन चीन का रुख अब भी थोड़ा रहस्यमयी बना हुआ है.

अमेरिका और चीन की मीटिंग में क्या तय हुआ?

दोनों देशों के बीच हुई बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि Hormuz Strait को खुला रखना होगा ताकि तेल की सप्लाई में कोई रुकावट न आए. अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने बताया कि चीन इस रास्ते के सैन्यीकरण और टोल सिस्टम लगाने के खिलाफ है, जो कि अमेरिका के स्टैंड के जैसा ही है. हालांकि, Rubio ने यह भी साफ़ कर दिया कि अमेरिका को ईरान के मामले में चीन की मदद की कोई ज़रूरत नहीं है.

ट्रंप के दावों और चीन के जवाब में क्या अंतर है?

राष्ट्रपति Donald Trump ने मीटिंग के बाद कुछ बड़े दावे किए, लेकिन चीन ने उन पर चुप्पी साधी हुई है:

  • हथियारों की सप्लाई: ट्रंप ने कहा कि Xi Jinping ने ईरान को सैन्य उपकरण न देने का वादा किया है.
  • अमेरिकी तेल: ट्रंप के मुताबिक चीन ने अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है ताकि वह Hormuz Strait पर अपनी निर्भरता कम कर सके.
  • चीन का पक्ष: चीन के विदेश मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में इन दावों का कोई ज़िक्र नहीं किया. चीन ने केवल यह कहा कि रास्ता जल्द से जल्द खुले और ईरान के साथ बातचीत के ज़रिए शांति कायम हो.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या स्थिति है?

दुनिया के कई बड़े नेताओं ने मिलकर मांग की है कि Hormuz Strait में फिर से सामान्य कामकाज शुरू हो. सभी देशों ने UNCLOS और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से समुद्र में आने-जाने की आज़ादी का समर्थन किया है. इससे पहले 7 मई 2026 को चीन ने साफ़ कर दिया था कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे दबाव के अभियान में शामिल नहीं होगा. चीन अभी भी इस विवाद में सीधे तौर पर पड़ने से बच रहा है, भले ही वह ईरान से भारी मात्रा में तेल खरीदता है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

Hormuz Strait विवाद का दुनिया पर क्या असर होगा

यह एक बहुत महत्वपूर्ण जलमार्ग है जहाँ से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल ले जाता है. अगर यह रास्ता बंद रहता है तो तेल की सप्लाई प्रभावित होगी और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं.

चीन इस मामले में क्या चाहता है

चीन का कहना है कि रास्ता जल्द खुले और ईरान के साथ बातचीत के ज़रिए एक स्थायी युद्धविराम हो. चीन ने साफ़ किया है कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिकी दबाव का हिस्सा नहीं बनेगा.