बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक हाई-लेवल मीटिंग हुई। इस बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर लंबी चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ़ कर दिया कि ईरान को संभालने के लिए अमेरिका को चीन की किसी मदद की ज़रूरत नहीं है।
ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच किन बातों पर बनी सहमति
दोनों देशों के नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz को खुला रखना बहुत ज़रूरी है ताकि दुनिया भर में तेल और ऊर्जा की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहे।
- परमाणु हथियार: दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए।
- समुद्री रास्ता: Strait of Hormuz को खुला रखने पर ज़ोर दिया गया।
- सुरक्षा: ऊर्जा के प्रवाह को सुरक्षित रखना प्राथमिकता रही।
चीन का रुख और अमेरिका से तेल की मांग
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि वह Strait of Hormuz के सैन्यीकरण के खिलाफ हैं और वहां टोल टैक्स लगाने के प्रयासों का विरोध करते हैं। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि चीन अब अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदना चाहता है ताकि उसे खाड़ी देशों के समुद्री रास्तों पर कम निर्भर रहना पड़े। मार्को रूबियो ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर बातचीत तो की लेकिन चीन से कोई मदद नहीं मांगी।
ईरान ने BRICS मीटिंग में क्या कहा
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने नई दिल्ली में हुई BRICS देशों की बैठक में अमेरिका और इसराइल की आलोचना की। उन्होंने इसे गैरकानूनी हमला बताया और सदस्य देशों से अपील की कि वे युद्ध भड़काने वाली हरकतों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। इसी बीच रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हाल ही में चीनी जहाजों सहित कई शिप को Strait of Hormuz से गुज़रने की अनुमति दी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिका ने ईरान के मामले में चीन से मदद मांगी है?
नहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ़ किया कि अमेरिका को ईरान के मुद्दे पर चीन की मदद की ज़रूरत नहीं है और राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग से इस बारे में कुछ नहीं मांगा।
Strait of Hormuz को लेकर अमेरिका और चीन की क्या राय है?
दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि Strait of Hormuz को खुला रखा जाना चाहिए ताकि ऊर्जा की सप्लाई बनी रहे। चीन ने वहां सैन्यीकरण और टोल टैक्स का विरोध किया है।
