अमेरिका अब ईरान के समुद्र में फंसे लगभग 140 मिलियन बैरल कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में बढ़ती तेल की कीमतों को कम करना और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन अगले 10 से 14 दिनों तक कीमतों को काबू में रखने के लिए ईरानी तेल का उपयोग कर सकता है। इस खबर के बाद वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 119 डॉलर से गिरकर 107-111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं।

तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार पर क्या असर होगा?

ईरान के तेल को बाजार में आने की अनुमति मिलने से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास जो 140 मिलियन बैरल तेल फंसा हुआ है, वह वैश्विक बाजार की 10 से 14 दिनों की मांग के बराबर है। जब इतनी बड़ी मात्रा में तेल बाजार में आएगा, तो कीमतों में और गिरावट आने की संभावना है। हालांकि, अमेरिकी संसद में प्रतिबंधों को सख्त करने के लिए बिल भी पास हुआ है, लेकिन प्रशासन आर्थिक स्थिरता के लिए इस तेल को बाजार में उतारने पर विचार कर रहा है।

भारत को होने वाले बड़े फायदे

भारत के लिए ईरान का तेल हमेशा से एक अच्छा विकल्प रहा है और इस छूट से कई लाभ मिल सकते हैं:

  • सस्ता ट्रांसपोर्ट: भारत और ईरान की भौगोलिक निकटता के कारण शिपिंग की लागत बहुत कम आती है और तेल जल्दी पहुंचता है।
  • रिफाइनरी के अनुकूल: भारत की रिफाइनरियां ईरानी ‘लाइट’ और ‘हेवी’ ग्रेड क्रूड को बिना किसी तकनीकी बदलाव के प्रोसेस कर सकती हैं।
  • सप्लाई का विकल्प: ईरानी तेल आने से रूस जैसे अन्य देशों पर भारत की निर्भरता कम होगी और भारत को बेहतर शर्तों पर तेल खरीदने की ताकत मिलेगी।
  • सुरक्षित समुद्री रास्ता: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत का 35-40% तेल आता है। तनाव कम होने से इस रास्ते पर भारत के जहाजों के लिए खतरा कम होगा।

क्या होगा आगे का परिणाम?

विषय संभावित प्रभाव
वैश्विक आपूर्ति 140 मिलियन बैरल नया तेल बाजार में आएगा
ईरान की कमाई ईरान को लगभग 15 बिलियन डॉलर का लाभ हो सकता है
भारत की बचत कम ट्रांसपोर्ट खर्च और बेहतर क्रेडिट शर्तें मिलेंगी
बाजार का भाव कच्चे तेल की कीमतों में 10 से 15 डॉलर तक की गिरावट संभव है
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.