भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिका द्वारा दी गई छूट पर अमेरिकी राजनीति में बड़ा विवाद शुरू हो गया है. विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है. इस हंगामे के बीच भारत की रिफाइनरियों ने अपनी ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदना जारी रखा है. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मार्च डिलीवरी के लिए लाखों बैरल तेल का आर्डर दिया है.

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रिलायंस ने कितना तेल खरीदा और इसके क्या कारण हैं?

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने मार्च डिलीवरी के लिए रूस से भारी मात्रा में तेल मंगाया है. इस तेल खरीद से जुड़ी कुछ अहम बातें इस प्रकार हैं:

  • रिलायंस ने कम से कम 60 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा है.
  • यह तेल मुख्य रूप से यूरल्स (Urals) ग्रेड का है जो प्रीमियम पर खरीदा गया है.
  • ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण मध्य-पूर्व की सप्लाई प्रभावित हुई है.

मध्य-पूर्व में तनाव के कारण भारत की 40% तेल आपूर्ति खतरे में पड़ गई थी. अगर भारत दूसरे देशों से यह आपूर्ति सुनिश्चित नहीं करता, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता था. इस वजह से रूसी तेल भारतीय कंपनियों के लिए एक अहम विकल्प बन गया है.

अमेरिकी सांसद क्यों कर रहे हैं विरोध?

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने हाल ही में भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी. यह छूट सिर्फ उस तेल के लिए है जो पहले से समुद्र में जहाजों पर लदा हुआ था.

  • डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से इस 30 दिन की छूट को वापस लेने की मांग की है.
  • अमेरिकी ऊर्जा सचिव ने इसे व्यावहारिक कदम बताया ताकि दुनिया भर में तेल के दाम काबू में रहें.
  • अमेरिका चाहता है कि यह तेल चीन के पास जाने से रुके और ग्लोबल मार्केट में आपूर्ति बनी रहे.

भारत सरकार के अधिकारियों ने साफ किया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर ही तेल खरीदता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने से रोकने के लिए अमेरिका ने यह स्टॉपगैप उपाय लागू किया था, जिस पर अब दोनों देशों की नजरें टिकी हुई हैं.