अमेरिका की एक अपील्स कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें विदेशी कामगारों के लिए H-1B वीज़ा पर 1,00,000 डॉलर की भारी-भरकम फीस लगाने की कोशिश की गई थी। बोस्टन की 1st U.S. Circuit Court of Appeals ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह फीस संसद की मंजूरी के बिना लगाया गया एक गैर-कानूनी टैक्स है, जिसे प्रशासन जबरन लागू नहीं कर सकता।
क्या था पूरा मामला
यह विवादित फीस 19 सितंबर 2025 को प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन 10973 के जरिए पेश की गई थी। इसका असर उन लोगों पर पड़ रहा था जो अमेरिका के बाहर से H-1B के लिए आवेदन कर रहे थे या जिन्हें कॉन्सुलर प्रोसेसिंग की जरूरत थी। कैलिफोर्निया के नेतृत्व में राज्य के अटॉर्नी जनरल ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। 8 जून 2026 को जज लियो टी. सोरोकिन ने इसे अवैध करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति के पास इस तरह का टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है और प्रक्रिया में नियमों का पालन भी नहीं किया गया था।
प्रवासियों को राहत
इस फैसले के बाद अब विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों को 1,00,000 डॉलर की फीस नहीं देनी होगी। USCIS (U.S. Citizenship and Immigration Services) जल्द ही नई गाइडलाइंस जारी करने वाला है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2027 के लिए H-1B वीज़ा का कोटा पहले ही पूरा हो चुका है। भारतीय पेशेवरों के लिए यह बड़ी राहत की बात है, क्योंकि इससे पहले इस भारी फीस के कारण कई कंपनियों ने विदेश से भर्ती करना बंद कर दिया था।
