अमेरिका में रहने वाले लगभग 3,000 यमनी नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। न्यूयॉर्क के एक फेडरल जज ने ट्रंप प्रशासन के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें इन लोगों की अस्थायी सुरक्षा (TPS) को खत्म करने की बात कही गई थी। इस कानूनी जीत के बाद अब इन प्रवासियों को फिलहाल अमेरिका में रहने की अनुमति मिल गई है।

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अदालत ने ट्रंप सरकार के फैसले को क्यों रोका?

मैनहट्टन के जिला न्यायाधीश Dale Ho ने शुक्रवार, 1 मई 2026 को यह आदेश जारी किया। अदालत ने पाया कि पूर्व होमलैंड सिक्योरिटी सचिव Kristi Noem ने TPS खत्म करने की प्रक्रिया में कांग्रेस द्वारा बनाए गए नियमों का पालन नहीं किया। जज ने अपने फैसले में मुख्य रूप से ये बातें कहीं:

  • नियमों की अनदेखी: सरकार ने देश की स्थिति की समीक्षा करने के लिए जो कानूनी प्रक्रिया अपनानी थी, उसे सही से पूरा नहीं किया।
  • समय सीमा: यमनी नागरिकों की सुरक्षा 4 मई 2026 को खत्म होने वाली थी, लेकिन अब इस आदेश से उन्हें और समय मिल गया है।
  • कानूनी चूक: कोर्ट ने कहा कि विभाग ने प्रक्रिया को शॉर्ट-कट में पूरा किया जो कि कानून के खिलाफ था।

जज और सरकार के बीच क्या विवाद हुआ?

इस मामले में जज Dale Ho ने काफी सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यमन से आए ये लोग अपराधी नहीं बल्कि कानून मानने वाले साधारण नागरिक हैं। उन्होंने पूर्व सचिव Kristi Noem के उस सोशल मीडिया मैसेज की भी आलोचना की जिसमें यमनी प्रवासियों के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।

दूसरी तरफ, सरकार का पक्ष कुछ अलग था:

  • DHS का बयान: होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) के प्रवक्ता ने कहा कि यमनी नागरिकों को अमेरिका में रहने देना राष्ट्रीय हित में नहीं है।
  • अदालत पर सवाल: सरकार ने कहा कि “अस्थायी” का मतलब अस्थायी ही होता है और यह फैसला केवल एक्टिविस्ट जजों की सोच है।
  • अधिकारों की बात: प्रवासियों के अधिकार के लिए काम करने वाली संस्था Asian American Legal Defense and Education Fund ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि मानवीय सुरक्षा को राजनीतिक कारणों से खत्म नहीं किया जा सकता।

Frequently Asked Questions (FAQs)

TPS क्या है और यमन के लोगों को यह कब मिला था?

TPS का मतलब Temporary Protected Status है। यह उन लोगों को मिलता है जिनके देश में युद्ध या संकट हो। यमन को पहली बार 2015 में ओबामा सरकार के दौरान यह दर्जा दिया गया था।

अदालत के इस फैसले का असर क्या होगा?

इस फैसले से लगभग 3,000 यमनी नागरिक जो अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें 4 मई 2026 के बाद भी वहां रहने की अनुमति मिल गई है और उन्हें तुरंत डिपोर्ट नहीं किया जा सकेगा।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com