अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया है जिसमें विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने वाली कंपनियों पर भारी-भरकम फीस लगाने की बात कही गई थी। इस फैसले से उन कंपनियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जो H-1B वीजा के तहत काम करते हैं।
क्या था डोनाल्ड ट्रंप का 1 लाख डॉलर फीस वाला प्रस्ताव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रस्ताव पेश किया था जिसके तहत कंपनियों को विशेष भूमिकाओं के लिए विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए 100,000 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 1 लाख डॉलर की भारी फीस देनी पड़ती। सोमवार को स्थानीय समयानुसार एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
इस फैसले से प्रवासियों और कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा
अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता तो अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी नागरिकों को नौकरी पर रखना बहुत महंगा हो जाता। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब कंपनियां बिना इस भारी-भरकम फीस के योग्य विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीजा कार्यक्रम के तहत काम पर रख सकेंगी। इससे अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहे विदेशी पेशेवरों के लिए रास्ते खुले रहेंगे और कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप के किस फैसले पर रोक लगाई है?
अमेरिकी कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव पर रोक लगाई है जिसमें H-1B वीजा के तहत विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए कंपनियों पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने की बात कही गई थी।
यह फीस किस वीजा कार्यक्रम के तहत लगाई जा रही थी?
यह फीस विशेष योग्यताओं वाले विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने वाले H-1B वीजा कार्यक्रम के तहत नियोक्ताओं पर लगाने का प्रस्ताव था।
