अमेरिका ने ईरान के खिलाफ छेड़ी आर्थिक जंग, राष्ट्रपति ट्रंप ने लगाए सख्त वैश्विक प्रतिबंध

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 19 अगस्त 2026 को ईरान के खिलाफ इतिहास के सबसे कड़े आर्थिक अभियान की शुरुआत करने का बड़ा ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद से वैश्विक स्तर पर ईरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने की तैयारी शुरू हो गई है, जिसका असर पूरी दुनिया के साथ-साथ क्षेत्रीय देशों पर भी पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि ये ऐतिहासिक कदम ईरान को पूरी तरह पंगु बना देंगे और दुनिया भर में आतंकवाद फैलाने की उनकी क्षमता को सीमित कर देंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।
सख्त प्रतिबंधों और वार्ताओं का दौर
यह बड़ा फैसला वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 60-दिन की बातचीत की समय सीमा खत्म होने के बाद आया है। बातचीत का यह दौर ईरान के परमाणु कार्यक्रम या होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर किसी भी व्यापक समझौते पर पहुंचे बिना ही समाप्त हो गया था। नए निर्देशों के तहत किसी भी देश या संस्था, जिसमें वित्तीय संस्थान, कंपनियां, हवाई अड्डे या सरकारी निकाय शामिल हैं, को ईरान का समर्थन करने पर गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने तुरंत प्रभाव से तेल तस्करी, नकद हस्तांतरण, एक्सचेंज ऑफिस, जहाज रजिस्टर्ड कराने और फर्जी कंपनियों के इस्तेमाल को पूरी तरह रोकने की कड़ी मांग की है।
खाली खोल बन चुका है ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का जिक्र करते हुए उसे एक 'खाली खोल' करार दिया है, जो इस समय पतन के कगार पर खड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान की सैन्य क्षमताएं बुरी तरह से प्रभावित और कमजोर हो चुकी हैं। अमेरिका की सेना ने ईरानी बंदरगाहों पर पूरी तरह से नौसेना की नाकाबंदी कर रखी है, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने 100 प्रतिशत सफल बताया है। अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण बना हुआ है, जहां अधिकारियों ने रोजाना लाखों बैरल तेल के आवागमन को आसान बनाने के लिए एक तय शिपिंग लेन बनाई है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं
अमेरिका ने भले ही ईरान के साथ सीधी बातचीत बंद करने की पुष्टि कर दी है, लेकिन अन्य क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय देश इस मामले में अभी भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf इस समय इराक में क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत कर रहे हैं। वहीं, रूस के उप विदेश मंत्री Georgy Borisenko ने बयान दिया है कि मॉस्को को होर्मुज जलडमरूमध्य से बेरोक-टोक आने-जाने की पूरी उम्मीद है। इसके अलावा, राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिण कोरिया की आलोचना करते हुए कहा कि उसने जलडमरूमध्य की सुरक्षा में कोई मदद नहीं की, जबकि पारगमन से जुड़े कुछ मुद्दों पर ओमान के साथ संप्रभुता को लेकर चर्चा की जा रही है।