US ने ईरान पर हमले को बताया सेल्फ डिफेंस, इसराइल के समर्थन में लिया फैसला, कानून के जानकारों ने जताया विरोध
अमेरिका के विदेश विभाग के बड़े वकील Reed Rubinstein ने ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया है. उन्होंने इसे ‘सेल्फ डिफेंस’ यानी आत्मरक्षा बताया और कहा कि यह इसराइल की मदद के लिए किया गया काम है. हालांकि, दुनिया भर के कई कानूनी एक्सपर्ट्स इस बात से सहमत नहीं हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ मान रहे हैं.
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अमेरिका ने ईरान पर हमले को सही क्यों बताया?
Rubinstein ने एक स्टेटमेंट में कहा कि अमेरिका 1979 से ही ईरान के साथ संघर्ष में है. उन्होंने दावा किया कि ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स ने अमेरिका और इसराइल पर कई बार हमले किए थे, इसलिए अमेरिका ने अपने साथी देश इसराइल के बचाव में यह कदम उठाया. उनके मुताबिक, यह कोई नया युद्ध नहीं है बल्कि पुराने विवाद का ही हिस्सा है, इसलिए इसके लिए किसी नए हमले के इंतज़ार की ज़रूरत नहीं थी.
अंतरराष्ट्रीय कानून और वॉर पावर्स एक्ट का क्या मामला है?
अमेरिका के 1973 वॉर पावर्स एक्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई को 60 दिनों से ज़्यादा चलाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है. इस मामले में 1 मई की समय सीमा तय की गई है. दूसरी तरफ, 100 से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने पत्र लिखकर कहा कि यह हमला UN चार्टर का सीधा उल्लंघन है. उनका कहना है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि ईरान से कोई तुरंत खतरा था जिससे इस हमले को सही ठहराया जा सके.
शांति वार्ता और नए सैन्य बदलाव की क्या स्थिति है?
पाकिस्तान में शांति वार्ता शुरू हुई है, जिसमें अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner शामिल हैं. इसमें ईरान के विदेश मंत्री के भी शामिल होने की उम्मीद है. वहीं, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर दिया है, जो पिछले दो दशकों में पहली बार हुआ है. पोप लियो ने भी दोनों देशों से बातचीत करने की अपील की है, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से युद्धविराम का उल्लंघन हो रहा है.