अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth को कांग्रेस में ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर काफी मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ा. इस युद्ध में अब तक लगभग 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं, जिसे लेकर अमेरिकी जनता और नेता दोनों ही नाराज दिख रहे हैं. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे पर अब सदन में बहस तेज हो गई है.
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ईरान युद्ध पर कितना पैसा खर्च हुआ और क्या था मकसद
पेंटागन के एक्टिंग कॉम्पट्रोलर Jules Hurst ने बताया कि Operation Epic Fury नाम के इस सैन्य अभियान में अब तक करीब 25 अरब डॉलर का खर्च आया है. इस भारी भरकम रकम का सबसे बड़ा हिस्सा हथियारों और गोला-बारूद पर खर्च हुआ, जबकि बाकी पैसा सैन्य रखरखाव और उपकरणों को बदलने में इस्तेमाल किया गया. रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने इस अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं बनाने दिया जा सकता. उन्होंने दावा किया कि जून 2025 में किए गए हवाई हमलों से ईरान की परमाणु सुविधाएं तबाह हो चुकी हैं.
अमेरिकी जनता की राय और सरकार का रुख
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका के ज्यादातर लोग इस युद्ध का विरोध कर रहे हैं. अप्रैल 2026 के सर्वे में पाया गया कि 54% लोग सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हैं, वहीं एक अन्य सर्वे में 63% लोगों का मानना था कि इस युद्ध की कोई ठोस वजह नहीं थी. इसके बावजूद, Pete Hegseth ने विरोध करने वाले नेताओं को कमजोर और हार मानने वाला बताया. उन्होंने कहा कि यह सैन्य ऑपरेशन एक बड़ी सफलता रही है.
क्या फिर से शुरू होगा युद्ध
पाकिस्तान की मध्यस्थता से 8 अप्रैल 2026 से युद्ध विराम (ceasefire) लागू है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकी हुई है. विवाद मुख्य रूप से Strait of Hormuz की घेराबंदी को लेकर है. राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कर दिया है कि जब तक परमाणु मुद्दों पर कोई समझौता नहीं होता, यह घेराबंदी जारी रहेगी. खबरों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप अब फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने या Strait of Hormuz के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं.
Frequently Asked Questions (FAQs)
Operation Epic Fury क्या है?
यह अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ चलाया गया एक सैन्य अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना था. इस अभियान में अब तक 25 अरब डॉलर खर्च हुए हैं.
क्या अमेरिका और ईरान के बीच अभी युद्ध चल रहा है?
8 अप्रैल 2026 से दोनों देशों के बीच युद्ध विराम लागू है, लेकिन बातचीत न होने के कारण तनाव बना हुआ है और भविष्य में फिर से हमले होने की संभावना है.