अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिका के रक्षा सचिव Pete Hegseth ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि उन्हें परमाणु हथियार न बनाने का साफ़ ऐलान करना चाहिए। 10 मार्च 2026 को पेंटागन में हुई एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान Hegseth ने स्पष्ट किया कि ईरान को राष्ट्रपति ट्रंप की बात मान लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।

अमेरिका ने ईरान के सामने कौन सी मुख्य शर्तें रखी हैं?

अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने इस सैन्य अभियान के तीन बड़े उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने साफ़ किया है कि अमेरिका तब तक चैन से नहीं बैठेगा जब तक ये लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। पेंटागन के अनुसार ईरान के पास अब मिसाइल दागने की क्षमता कम होती जा रही है जो उनके अभियान की सफलता का संकेत है।

  • ईरान के मिसाइल भंडारों और उनके उत्पादन केंद्रों को पूरी तरह तबाह करना।
  • ईरानी नौसेना की सैन्य शक्ति को खत्म करना।
  • ईरान को भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार बनाने से रोकना।

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों पर क्या होगा असर?

ईरान और अमेरिका के इस संघर्ष का सीधा असर कुवैत और अन्य खाड़ी देशों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। कुवैत के हवाई क्षेत्र में मिसाइल गतिविधियों की खबरें आई हैं और वहां के पोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की बात भी सामने आई है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है क्योंकि हवाई यात्रा और सुरक्षा नियमों में बदलाव की संभावना बनी रहती है। Hegseth के मुताबिक 10 मार्च ईरान के अंदर अब तक के सबसे भीषण हमलों का दिन रहा है।

तारीख महत्वपूर्ण घटनाक्रम
28 फरवरी 2026 Ali Khamenei की मौत के साथ संघर्ष की शुरुआत
8-9 मार्च 2026 Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर चुना गया
10 मार्च 2026 अमेरिका ने परमाणु हथियार पर दी सीधी चेतावनी