14 जुलाई 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका ने हूती विद्रोहियों को हथियार मिलने की घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिकी दूत Tammy Bruce ने कहा कि हूती गुट संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 2216 का पालन नहीं कर रहे हैं, जो हथियारों की सप्लाई पर पूरी तरह से रोक लगाता है। इस दौरान यमन की संप्रभुता को लेकर ईरान की भूमिका पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई।
ईरान की भूमिका और हवाई उड़ानों पर विवाद
अमेरिकी दूत ने आरोप लगाया कि 3 जुलाई 2026 को ईरान ने एक विमान के जरिए हूती विद्रोहियों के पास IRGC के सदस्य और मिसाइल विशेषज्ञ भेजे थे। इसके अलावा, अमेरिका ने दावा किया है कि हूती विद्रोहियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 70% दोहरे उपयोग वाले निर्यात का स्रोत चीन है। यमन सरकार ने भी अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा है कि सना एयरपोर्ट पर बिना अनुमति के ईरानी उड़ानों का उतरना यमन की संप्रभुता का उल्लंघन है। इसी कारण 13 जुलाई 2026 को यमनी रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी देने के बाद सना एयरपोर्ट के रनवे को निशाना बनाया था।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और सुरक्षा के दावे
इस मुद्दे पर कई देशों ने अपनी बात रखी। बहरीन और फ्रांस के प्रतिनिधियों ने हूती हमलों और ईरान की गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया। ब्रिटेन ने भी ईरानी विमानों के यमन में उतरने पर गहरी चिंता जाहिर की है। वहीं, हूती प्रवक्ता Yahya Saree ने दावा किया कि उन्होंने 13 जुलाई 2026 को सऊदी अरब के Abha International Airport पर हमले किए, जिसे उन्होंने सऊदी हवाई हमलों का बदला बताया। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वे इस क्षेत्र में शांति के लिए प्रतिबंधों सहित सभी उपलब्ध विकल्पों का उपयोग करने के लिए तैयार हैं।
