अमेरिका की सेना (CENTCOM) ने साफ किया है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर हमले के दावे पूरी तरह झूठे हैं। अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने कुवैत और बहरीन की तरफ आ रहे ईरान के मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है। इस हमले में अमेरिकी सेना या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

कुवैत और बहरीन में क्या हुआ और कैसे फेल हुए हमले

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि 2 और 3 जून 2026 की रात को कुवैत में अमेरिकी बलों पर हमला करने की कोशिश कर रहे कई ईरानी ड्रोनों को मार गिराया गया। इसके अलावा बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) के मुख्यालय पर हमले के दावों को भी अमेरिका ने खारिज कर दिया। बहरीन में सायरन बजाए गए थे और बहरीन के साथ मिलकर अमेरिकी वायु सेना ने इन खतरों को समय रहते टाल दिया। कुवैत की सेना ने भी पुष्टि की है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने संदिग्ध हवाई हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया है।

ईरान और अमेरिका के बीच क्यों बढ़ा तनाव

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया था कि उन्होंने बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे और Panaya नाम के एक जहाज पर हमला किया है। ईरान का कहना था कि यह कार्रवाई उनके एक टैंकर और कम्यूनिकेशन टावर पर अमेरिकी हमले के जवाब में की गई थी। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने भी कार्रवाई करते हुए ईरान के केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर बने एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को हवाई हमले में तबाह कर दिया। दोनों देशों के बीच अप्रैल से चल रहा युद्धविराम इस तनाव के बाद अब खतरे में आ गया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या ईरान के हमले में अमेरिकी सेना को कोई नुकसान हुआ है?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार इस हमले में अमेरिकी सेना के किसी भी जवान या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और सभी ड्रोन और मिसाइलें रास्ते में ही नष्ट कर दी गईं।

अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ क्या जवाबी कार्रवाई की?

अमेरिकी वायु सेना ने अपनी रक्षा में बड़ी कार्रवाई करते हुए ईरान के केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर स्थित सैन्य ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर हमला किया और उसे नष्ट कर दिया।