ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया था कि अमेरिका ने तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर सहमति जताई है, लेकिन अब अमेरिका ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। इस खींचतान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार और कूटनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है।
अमेरिका ने क्यों नकारा ईरान के दावे?
एक अमेरिकी अधिकारी ने साफ तौर पर कहा कि बातचीत जारी रहने के दौरान तेल प्रतिबंध हटाने की खबरें झूठी हैं। अमेरिका ने ऐसी कोई छूट (waiver) नहीं दी है। दरअसल, ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने खबर चलाई थी कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) तेल क्षेत्र के लिए अस्थायी छूट जारी कर रहा है, लेकिन CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
पर्दे के पीछे क्या चल रहा है और क्या है अमेरिका की रणनीति?
अमेरिका अभी भी ईरान पर मैक्सिमम प्रेशर की नीति अपना रहा है ताकि ईरान को मिलने वाला राजस्व आतंकवाद की फंडिंग के लिए इस्तेमाल न हो सके। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह चेतावनी दी है कि डील के लिए समय तेजी से निकल रहा है और यदि कूटनीति विफल रही तो सैन्य कार्रवाई की संभावना हो सकती है।
- ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था।
- इस प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की गई थी।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के इस ताजा शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
प्रतिबंधों की समय सीमा और नए कड़े नियम
ईरान के तेल प्रतिबंधों पर दी गई पुरानी अस्थायी छूट 19 अप्रैल 2026 को ही खत्म हो गई थी और उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी पहले ही साफ कर दिया था कि इन परमिट्स का विस्तार नहीं होगा। साथ ही, फाइनेंशियल क्राइम्स एनफोर्समेंट नेटवर्क (FinCEN) ने वित्तीय संस्थानों के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं ताकि तेल तस्करी और डिजिटल एसेट्स के जरिए प्रतिबंधों से बचने वाले रास्तों को पकड़ा जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिका ने ईरान के तेल प्रतिबंध हटा लिए हैं?
नहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तेल प्रतिबंध हटाने की खबरें गलत हैं और फिलहाल कोई छूट नहीं दी गई है।
ईरान ने अमेरिका के सामने क्या प्रस्ताव रखा था?
ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था, जिसमें समुद्री प्रतिबंध हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग शामिल थी।
