अमेरिका और ईरान के बीच जमी हुई संपत्ति को लेकर विवाद बढ़ गया है। हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए पैसे वापस करने वाला है, लेकिन व्हाइट हाउस ने इस बात से साफ इनकार कर दिया है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब दोनों देशों के बड़े प्रतिनिधि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति और युद्धविराम के लिए बातचीत कर रहे हैं।

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अमेरिका ने क्यों किया इनकार और क्या है पूरा मामला?

शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को रॉयटर्स के हवाले से ईरानी सूत्रों ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की जमी हुई संपत्ति को छोड़ने पर सहमति बना ली है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस खबर को तुरंत गलत बताया। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि अभी बैठकें शुरू भी नहीं हुई हैं, इसलिए ऐसी रिपोर्टें पूरी तरह गलत हैं।

कतर में कितने पैसे जमा हैं और विवाद क्या है?

सितंबर 2023 में दक्षिण कोरियाई बैंकों से लगभग 6 अरब डॉलर ईरान के तेल के पैसे कतर के प्रतिबंधित खातों में भेजे गए थे। यह सौदा कैदियों की अदला-बदली के दौरान हुआ था। शुरुआत में ये पैसे केवल मानवीय मदद के लिए थे, लेकिन अक्टूबर 2023 में इजराइल पर हुए हमलों के बाद बाइडन सरकार ने इन पैसों को फिर से फ्रीज कर दिया। अमेरिका का कहना है कि ईरान इन पैसों का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा और वाशिंगटन के पास इन खातों को पूरी तरह ब्लॉक करने का अधिकार है।

इस्लामाबाद की बातचीत में कौन-कौन शामिल है?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर की मौजूदगी में यह हाई-लेवल मीटिंग हो रही है। ईरान की शर्त है कि जब तक अमेरिका पैसा नहीं छोड़ता और इजराइल लेबनान में हमले बंद नहीं करता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। मीटिंग में शामिल मुख्य लोग नीचे दी गई टेबल में हैं:

देश प्रमुख प्रतिनिधि
United States JD Vance, Steve Witkoff, Jared Kushner
Iran Mohammad Bagher Ghalibaf, Abbas Araghchi
Pakistan Shehbaz Sharif, Syed Asim Munir, Ishaq Dar
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.