Middle East Tension: डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ाया दबाव, इसराइल और लेबनान के बीच सीज़फायर बढ़ा, ईरान की हरकतों से दुनिया परेशान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में शांति लाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। उन्होंने इसराइल और लेबनान के बीच चल रहे सीज़फायर को 3 हफ्ते के लिए बढ़ा दिया है। हालांकि, इस बीच ईरान के साथ तनाव बढ़ रहा है और समुद्री रास्तों को लेकर विवाद जारी है। अल जजीरा के रिपोर्टर एलन फिशर ने वाशिंगटन से इस पूरे मामले की जानकारी दी है।

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इसराइल और लेबनान के बीच सीज़फायर को लेकर क्या हुआ फैसला?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को इसराइल और लेबनान के बीच सीज़फायर को तीन हफ्ते के लिए आगे बढ़ाने का ऐलान किया। यह फैसला व्हाइट हाउस में हुई बड़ी मीटिंग के बाद लिया गया, जिसमें उपराष्ट्रपति JD Vance और विदेश मंत्री Marco Rubio भी शामिल थे। ट्रंप आने वाले समय में इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन की मेजबानी करेंगे ताकि एक बड़ा शांति समझौता हो सके।

इस समझौते के बावजूद जमीन पर स्थिति अभी भी मुश्किल बनी हुई है। हिजबुल्लाह ने आधिकारिक तौर पर इस युद्धविराम को नहीं माना है। लेबनान चाहता है कि इसराइल उसके दक्षिणी इलाकों से पीछे हटे और कैदियों को रिहा करे, जबकि इसराइल हिजबुल्लाह की सैन्य ताकत को पूरी तरह खत्म करने की मांग कर रहा है।

ईरान और अमेरिका के बीच समुद्री विवाद और सैन्य तनाव क्या है?

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाना शुरू कर दिया है और उससे कमाई भी की है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी रखेगा, वह इस रास्ते को पूरी तरह नहीं खोलेगा। उधर, अमेरिका के CENTCOM ने बताया कि 13 अप्रैल से लागू नाकेबंदी के बाद उन्होंने 33 ईरानी जहाजों को वापस लौटने का आदेश दिया है।

तनाव को देखते हुए अमेरिका ने क्षेत्र में USS George H.W. Bush एयरक्राफ्ट कैरियर भेजा है, जिससे अब वहां अमेरिकी विमान वाहकों की संख्या तीन हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे, क्योंकि उनके मुताबिक पुराने हमलों ने ईरान को पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया है।

आम लोगों और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा सुरक्षा खतरा बन सकती है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों और दुनिया भर की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। हाल ही में ईरान ने इस रास्ते के पास दो कंटेनर जहाजों को भी अपने कब्जे में लिया है।

सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय संकट भी गहरा रहा है। लेबनान ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि इसराइल द्वारा 2023 से अब तक 28 पत्रकारों की हत्या के मामले की जांच की जाए। सीज़फायर बढ़ने के बावजूद सीमा पर हिजबुल्लाह के ड्रोन हमले और इसराइल की एयरस्ट्राइक जारी हैं, जिससे आम लोगों में डर का माहौल है।