अमेरिका के न्याय विभाग (US DOJ) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके साथियों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है. विभाग ने फेडरल जज को बताया कि यह केस कभी लाया ही नहीं जाना चाहिए था. अब इस मामले की पूरी सुनवाई न्यूयॉर्क के एक कोर्ट में होनी है.

क्या थे आरोप

यह मामला 2024 में शुरू हुआ था. इसमें गौतम अडानी और सात अन्य लोगों पर आरोप लगे थे कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को करीब 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत दी. यह सब सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स पाने और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करके अरबों डॉलर का निवेश जुटाने के लिए किया गया था. उन पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप थे.

केस वापस लेने की मुख्य वजहें

US DOJ ने 4 जुलाई 2026 को कोर्ट में एक विस्तृत दस्तावेज जमा किया. इसमें केस खत्म करने के लिए ये कारण बताए गए हैं:

मुख्य कारण विस्तार
विदेशी घटनाएँ ज्यादातर मामले भारत से जुड़े थे और भारतीयों ने ही भारतीय कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए काम किया था.
भारतीय जाँच भारतीय अधिकारियों ने इन आरोपों की जाँच की और कोई गड़बड़ी नहीं पाई.
कोई आर्थिक नुकसान नहीं अमेरिकी निवेशकों को कोई वित्तीय घाटा नहीं हुआ और उनका पैसा वापस मिल गया.
सबूतों की मुश्किल मुख्य गवाह और सबूत विदेश में हैं, जिससे केस आगे बढ़ाना मुश्किल है.
कानूनी अधिकार यह मामला अमेरिका के बाहर का है, इसलिए यहाँ कानूनी कार्रवाई का आधार कमजोर है.
नई प्राथमिकताएं यह केस ट्रंप प्रशासन की मौजूदा प्राथमिकताओं के हिसाब से सही नहीं है.

इससे पहले जज निकोलस गैराउफिस ने DOJ से इस फैसले की पूरी जानकारी मांगी थी. उन्होंने शुरुआत में दी गई अर्जी को बहुत मामूली और अधूरा बताया था. वहीं, DOJ ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया जिनमें कहा गया था कि यह फैसला अडानी ग्रुप द्वारा अमेरिका में निवेश करने के वादे के बाद लिया गया है.

गौतम अडानी और अडानी ग्रुप ने हमेशा इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है. उन्होंने कहा कि वे बिजनेस के सभी नियमों और शासन के उच्चतम मानकों का पालन करते हैं.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.