अमेरिकी डॉलर की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की संभावनाओं के कारण निवेशकों में उम्मीद जगी है, जिसकी वजह से डॉलर की मांग कम हुई। इस हफ्ते डॉलर में जनवरी के बाद सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है, जबकि दूसरी वैश्विक करेंसी मज़बूत हुई हैं।

डॉलर और अन्य करेंसी के भाव में क्या बदलाव आया?

बाज़ार के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स में गिरावट आई है और अन्य देशों की करेंसी ने बढ़त बनाई है। इसका पूरा ब्यौरा नीचे दी गई टेबल में है:

करेंसी/इंडेक्स बदलाव या मौजूदा भाव
डॉलर इंडेक्स (साप्ताहिक) 1.6% की गिरावट
यूरो 1.8% उछाल ($1.173)
ब्रिटिश पाउंड 2% उछाल ($1.347)
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगभग 3% उछाल (70 सेंट से ऊपर)
न्यूजीलैंड डॉलर लगभग 3% उछाल
चीनी युआन 15 महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त
जापानी येन 159.255 येन प्रति डॉलर

डॉलर के गिरने की मुख्य वजह क्या रही?

डॉलर में इस गिरावट का बड़ा कारण इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका और ईरान की शांति वार्ता है। इसके अलावा, इज़राइल और लेबनान के बीच बातचीत शुरू करने के समझौते से बाज़ार में सकारात्मक माहौल बना। जब दुनिया में तनाव कम होता है, तो निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर को छोड़कर अन्य संपत्तियों में पैसा लगाते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल को दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिससे बाज़ार को सहारा मिला।

महंगाई और ब्याज दरों पर क्या असर पड़ेगा?

मार्च के महीने में अमेरिका में महंगाई पिछले चार सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गई थी। मार्केट एक्सपर्ट रज़ान हिलाल ने बताया कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों की वजह से अमेरिका का फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों को अभी स्थिर रख सकता है। वहीं, जेपी मॉर्गन की विश्लेषक नोरा सेंटिवानी ने अनुमान लगाया है कि पश्चिमी यूरोप में साल के बीच तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.