अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के लिए अपने एक्सपोर्ट नियमों में बड़ी ढील दी है। US Department of Commerce ने 10 जुलाई 2026 को यह फैसला लिया है। अब UAE को मिलिट्री सामान, कमर्शियल सैटेलाइट, स्पेसक्राफ्ट और एडवांस कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
अमेरिकी सरकार ने इस फैसले को औपचारिक रूप दे दिया है और 14 जुलाई 2026 को इसे Federal Register में प्रकाशित किया जाएगा। इस कदम का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना है।
Commerce Department के Bureau of Industry and Security (BIS) ने Export Administration Regulations (EAR) के तहत UAE के स्टेटस को अपग्रेड कर दिया है। अब UAE को EAR Country Group A:5 में रखा गया है। पहले UAE ग्रुप D:3 और D:4 में था, जिसकी वजह से उसके ड्रोन प्रोग्राम (unmanned aerial vehicle programs) पर कई पाबंदियां थीं, जो अब हटा ली गई हैं।
इस बदलाव के बाद अब UAE सरकार और मंजूरशुदा कमर्शियल कंपनियां License Exception Strategic Trade Authorization (STA) के तहत बिना लाइसेंस के सामान मंगवा सकेंगी। इसमें ये चीजें शामिल हैं:
- मिलिट्री सामान: कॉमर्स डिपार्टमेंट द्वारा नियंत्रित सैन्य उपकरण।
- स्पेस तकनीक: खास कमर्शियल सैटेलाइट और स्पेसक्राफ्ट।
- इंडस्ट्रियल तकनीक: तेल और गैस उत्पादन, पानी साफ करने वाले प्लांट (desalination) और सिविल न्यूक्लियर पावर जनरेशन से जुड़ी तकनीकें।
BIS ने बताया कि यह फैसला UAE को एक Major Defense Partner मानने और ‘Operation Epic Fury’ में उसके योगदान की वजह से लिया गया है। अमेरिका ने यह भी माना है कि UAE संवेदनशील अमेरिकी तकनीक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
जानकारों का कहना है कि यह फैसला मई 2025 में साइन हुए U.S.-UAE Artificial Intelligence Cooperation फ्रेमवर्क के बाद आया है। इससे आने वाले समय में दोनों देशों के बीच तकनीकी और व्यापारिक सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
