अमेरिका की ट्रंप सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Israel, Qatar, Kuwait और UAE को 8.6 अरब डॉलर के आपातकालीन हथियार बेचने की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के लिए सरकार ने अमेरिकी संसद यानी Congress की सामान्य समीक्षा प्रक्रिया को छोड़ दिया। यह फैसला फरवरी में ईरान के साथ हुए हमले के बाद लिया गया है ताकि इन देशों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

किन देशों को क्या हथियार मिलेंगे और कितना होगा खर्च

अमेरिकी विदेश विभाग ने यह साफ किया है कि इन हथियारों का मकसद उन देशों के स्टॉक को फिर से भरना है जिनके हथियार ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में कम हो गए थे। इसमें मुख्य रूप से हवाई हमले रोकने वाले सिस्टम और सटीक निशाने वाले हथियार शामिल हैं।

देश हथियार/सिस्टम अनुमानित लागत
Qatar Patriot मिसाइल इंटरसेप्टर्स 4 अरब डॉलर से ज्यादा
Kuwait एडवांस्ड हवाई रक्षा सिस्टम करीब 2.5 अरब डॉलर
Israel APKWS (सटीक मारक हथियार) कुल बजट का हिस्सा
UAE APKWS (सटीक मारक हथियार) कुल बजट का हिस्सा
कुल राशि 8.6 अरब डॉलर

इन हथियारों की सप्लाई के लिए BAE Systems, Lockheed Martin, RTX और Northrop Grumman जैसी बड़ी कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नियमों को क्यों ताका और क्यों हो रहा है विरोध

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इन हथियारों की बिक्री के लिए ‘आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट’ की धारा 36(b) का इस्तेमाल किया। यह नियम सरकार को तब अधिकार देता है जब देश की सुरक्षा के लिए कोई आपातकालीन स्थिति हो और समय कम हो। इस तरह से संसद की मंजूरी के बिना ही डील फाइनल कर दी गई।

हालांकि, इस फैसले पर अमेरिकी संसद में काफी विवाद है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता Gregory W. Meeks ने इसे सत्ता का गलत इस्तेमाल बताया है। उनका कहना है कि सरकार पारदर्शिता को नजरअंदाज कर रही है और बिना जवाबदेही के बड़े फैसले ले रही है। कुछ लोगों ने यह चिंता भी जताई है कि इतने बड़े पैमाने पर हथियार बेचने से अमेरिका के अपने भंडार में कमी आ सकती है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने बिना संसद की मंजूरी के हथियार क्यों बेचे

विदेश मंत्री Marco Rubio ने आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट की धारा 36(b) का उपयोग किया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आपातकालीन स्थिति में संसद की समीक्षा को छोड़ने की अनुमति देता है।

इन हथियारों की बिक्री का मुख्य कारण क्या है

फरवरी 2026 में ईरान के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद Israel और Gulf देशों के हथियारों का स्टॉक कम हो गया था, जिसे फिर से भरने और हवाई सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया।