अरब सागर में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत दिखाते हुए USS Tripoli जहाज से F-35 फाइटर जेट्स की गश्त शुरू कर दी है। इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है, जिसकी वजह से कई व्यापारिक जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है।

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ क्या बड़े कदम उठाए हैं?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी है कि USS Tripoli जहाज से F-35B लाइटनिंग II फाइटर जेट्स अरब सागर में लगातार गश्त कर रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नौसेना को यह अधिकार दे दिया है कि अगर ईरान की कोई तेज रफ्तार नाव होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों का रास्ता रोकती है या पानी में माइन बिछाने की कोशिश करती है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाए। अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई इस घेराबंदी के कारण अब तक 34 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है।

मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैन्य ताकत और ताजा अपडेट

इस समय मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपनी भारी सैन्य तैनाती की है, जिसकी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • तीन एयरक्राफ्ट कैरियर: दशकों बाद पहली बार USS Abraham Lincoln, USS Gerald R. Ford और USS George H.W. Bush जैसे तीन बड़े युद्धपोत एक साथ इस क्षेत्र में तैनात हैं।
  • तेल टैंकरों की जब्ती: अमेरिकी सेना ने Tifani और Majestic X नाम के दो टैंकरों को पकड़ा है, जो ईरान का प्रतिबंधित तेल ले जा रहे थे।
  • बातचीत रद्द: राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने वाले विशेष दूतों की यात्रा को रद्द कर दिया है।
  • ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: इस सैन्य अभियान के तहत अब तक 11,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं।

ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्र पर असर

अमेरिका की इन हरकतों के जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपना नियंत्रण बढ़ाते हुए एक ऐसा क्षेत्र बना दिया है, जहाँ कमर्शियल जहाजों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। मार्केट के जानकारों का मानना है कि ईरान जल्द ही किसी क्षेत्रीय ठिकाने पर जवाबी हमला कर सकता है। इस तनाव की वजह से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और समुद्री व्यापार पर बुरा असर पड़ने की संभावना है।