अमेरिका की सेना ने ईरान के समुद्री रास्तों पर सख्त पाबंदी लगा दी है। United States Central Command (CENTCOM) ने ईरान के बंदरगाहों की पूरी तरह घेराबंदी कर दी है, जिससे जहाजों का आना-जाना लगभग बंद हो गया है। अब तक 38 जहाजों को वापस लौटने के लिए कहा गया है, जिससे पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया है।

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर क्या पाबंदी लगाई है?

यह समुद्री नाकाबंदी 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से शुरू हुई थी। CENTCOM ने साफ किया है कि यह नियम उन सभी जहाजों पर लागू होगा जो ईरान के बंदरगाहों की तरफ जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। इसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाह शामिल हैं। हालांकि, जो जहाज केवल Strait of Hormuz से गुजरकर किसी दूसरे देश के बंदरगाह जा रहे हैं, उन्हें रोका नहीं जाएगा।

  • CENTCOM के एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि नाकाबंदी शुरू होने के 36 घंटों के भीतर ही ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह रुक गया था।
  • अमेरिकी सेना ने M/V Sevan नाम के एक जहाज को भी पकड़ा, जो ईरान के ऊर्जा उत्पादों को ले जा रहा था।
  • अब तक कुल 38 जहाजों को वापस लौटने या बंदरगाह लौटने का निर्देश दिया गया है।

ईरान और दुनिया के बड़े देशों का इस पर क्या कहना है?

ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई को समुद्री डकैती और लूटपाट बताया है। ईरान के खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने चेतावनी दी है कि उनकी सेना पूरी तरह तैयार है और वे इसका करारा जवाब देंगे। दूसरी तरफ, दुनिया के बड़े देशों में इस बात की चिंता है कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करने पर चर्चा की है। इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 27 अप्रैल 2026 को रूस पहुंचे हैं, जहां वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.