अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने नॉर्थ अरेबियन सी में ईरान से जुड़े एक मालवाहक जहाज ‘Touska’ पर कब्जा कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद ईरान ने इसे समुद्री डकैती करार दिया है और अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। इस घटना से दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।
अमेरिका ने कैसे किया जहाज पर कब्जा?
अमेरिकी नेवी के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Spruance ने जब Touska जहाज को देखा, तो उसे रुकने के लिए कहा। करीब 6 घंटे तक कई चेतावनियाँ दी गईं, लेकिन जहाज के चालक दल ने बात नहीं मानी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने अपनी 5-इंच की MK 45 गन से जहाज के इंजन रूम में गोले दागे, जिससे जहाज की रफ्तार रुक गई। इसके बाद 31st मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के सैनिकों ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने कब्जे में ले लिया।
जहाज को पकड़ने के पीछे क्या कारण थे?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि यह जहाज अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिबंधों की लिस्ट में था क्योंकि इसका पिछला रिकॉर्ड गैरकानूनी गतिविधियों का रहा है। अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू की है। 16 अप्रैल को नियमों में बदलाव किया गया, जिसके तहत अमेरिकी सेना को हाई सीज़ पर किसी भी संदिग्ध जहाज की तलाशी लेने और उसे जब्त करने का अधिकार मिल गया।
ईरान की प्रतिक्रिया और आने वाले खतरे
ईरान के सैन्य मुख्यालय ने इस कार्रवाई को सीजफायर का उल्लंघन और समुद्री डकैती बताया है। ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मदरेजा आरिफ ने कहा कि अगर ईरान के तेल निर्यात को रोका गया, तो सबको इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। इस घटना की वजह से इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान बातचीत भी अब खतरे में है। वहीं, 22 अप्रैल को सीजफायर खत्म होने वाला है, जिससे माहौल और गरमा सकता है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| घटना की तारीख | 19 अप्रैल 2026 |
| जहाज का नाम | M/V Touska (ईरानी ध्वज) |
| अमेरिकी जहाज | USS Spruance (DDG 111) |
| अमेरिकी यूनिट | 31st मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट |
| लोकेशन | नॉर्थ अरेबियन सी |
| मुख्य आरोप | अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन |
