अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने Strait of Hormuz के पास ईरान के दो हमलावर ड्रोन को मार गिराया। यह कदम तब उठाया गया जब अधिकारियों को लगा कि ये ड्रोन व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बन सकते हैं। इस घटना से दुनिया के ऊर्जा व्यापार वाले रास्ते पर सुरक्षा का जोखिम बढ़ गया है।
क्या हुआ पूरा मामला
12 और 13 जून 2026 को अमेरिकी सेना ने ईरान के उन ड्रोन को निशाना बनाया जो व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की कोशिश कर रहे थे। US Central Command (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने सभी ड्रोन को गिरा दिया है और समुद्र के रास्ते से जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी है। सेना ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का यह रास्ता खुला हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और गुप्त मिशन
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ईरान के ड्रोन हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और ईरान को अपनी हरकतें सुधारने की चेतावनी दी। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी बताया कि मई महीने से अमेरिकी सेना एक गुप्त मिशन चला रही है, जिसके तहत वे इस रणनीतिक रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा दे रहे हैं।
ईरान का पक्ष और शांति वार्ता
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि मध्य पूर्व के युद्ध को खत्म करने का समझौता अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी समझौते के तहत ईरान Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा। ईरान का कहना है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की सेना की अनुमति लेनी होगी।
पाकिस्तान की भूमिका और मौजूदा स्थिति
- अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है जिसमें Pakistan मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
- ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) का दावा है कि इलाके में अस्थिरता की वजह अमेरिका की हरकतें हैं।
- दोनों देशों के बीच एक ड्राफ्ट समझौते की बात हो रही है, लेकिन कुछ शर्तों को लेकर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।
