अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच बहरीन के मनामा में एक बहुत बड़ी बैठक हुई। 25 जून 2026 को हुई इस मीटिंग में दोनों पक्षों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की बात कही। इस चर्चा का मुख्य मकसद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाना था।

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ईरान पर लगाम और परमाणु हथियारों का खतरा

इस बैठक की अध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और बहरीन के विदेश मंत्री Abdullatif bin Rashid Al Zayani ने की। मीटिंग में नेताओं ने 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MOU) का स्वागत किया, जिसमें पाकिस्तान और कतर ने बीच-बचाव की अहम भूमिका निभाई थी।

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने दो बड़ी चेतावनी दीं। उन्होंने साफ कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। साथ ही, उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और यहां किसी भी तरह की फीस या टैक्स नहीं लिया जा सकता। ईरान के साथ व्यापार और निवेश तभी संभव होगा जब वह समझौते का पालन करेगा और अपनी अस्थिर हरकतों को बंद करेगा।

गाजा का पुनर्निर्माण और शांति योजना

बैठक में गाजा में जंग खत्म करने और वहां फिर से निर्माण कार्य शुरू करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की ‘Comprehensive Plan’ का समर्थन किया गया। इस योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 में मंजूरी मिल चुकी है।

  • गाजा के पुनर्निर्माण के लिए वहां के सभी गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को निशस्त्र करना जरूरी बताया गया।
  • प्रशासनिक जिम्मेदारी एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी तकनीकी समिति को सौंपने की बात कही गई।
  • यह भरोसा दिलाया गया कि किसी भी व्यक्ति को गाजा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा और जो जाना चाहते हैं वे वापस लौट सकेंगे।
  • फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया गया।

सीरिया, लेबनान और इराक की स्थिति

नेताओं ने सीरिया और लेबनान में स्थिरता लाने पर भी चर्चा की। सीरिया में आतंकवाद से लड़ने, बुनियादी सेवाएं बहाल करने और शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी में मदद करने का फैसला लिया गया। लेबनान में सभी गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों के हथियार डालने और लेबनानी सेना को मजबूत करने की मांग की गई। इसके अलावा, इराक में ईरान समर्थित समूहों द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की गई।

ईरान ने जताया विरोध

इस साझा बयान पर ईरान ने 26 जून 2026 को कड़ी प्रतिक्रिया दी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे “दखलअंदाजी और उकसाने वाला” बताया। ईरान ने कहा कि अमेरिका की मौजूदगी इलाके में असुरक्षा और बंटवारे का कारण है। साथ ही, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताते हुए उन आरोपों को खारिज कर दिया जिनमें उसे परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने वाला बताया गया था।